धर्मांतरित हुए आदिवासियों को छोड़ना पड़ेगा सैकड़ों एकड़ जमीन 🟥 जशपुर से शुरुवात, पूरे प्रदेश में पड़ेगा असर

धर्मांतरित हुए आदिवासियों को छोड़ना पड़ेगा सैकड़ों एकड़ जमीन 🟥 जशपुर से शुरुवात, पूरे प्रदेश में पड़ेगा असर


📦 🔴 हाइलाइट्स (एक नजर में)

▪ 114 एकड़ जमीन वापस कराने का आदेश  
▪ धर्मांतरण = गैर-आदिवासी की स्पष्ट व्याख्या  
▪ 85 ब्लॉकों में हजारों एकड़ पर असर  
▪ लंबित सौदे रद्द होने की संभावना  
▪ PVTG समुदाय को बड़ी राहत  



जशपुरनगर, 8 अप्रैल 2026 — छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में कलेक्टर रोहित व्यास ने धारा 170-ख के तहत ऐसा तीखा और दूरगामी फैसला सुनाया है कि पूरे प्रदेश में हलचल मच गई है। 1955-1966 के बीच धर्म परिवर्तन (मतांतरित) कर चुके व्यक्तियों द्वारा हड़पी गई पहाड़ी कोरवा आदिवासियों की 114 एकड़ जमीन को पूरी तरह अवैध करार देते हुए मूल स्वामियों को वापस लौटाने का आदेश दे दिया गया।

यह फैसला इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि पहली बार किसी प्रशासनिक अधिकारी ने साफ कहा है — धर्म बदलने वाला आदिवासी, आदिवासी नहीं रह जाता। वह गैर-आदिवासी बन जाता है। अब उसे भी आदिवासी जमीन खरीदने के लिए कलेक्टर की पूर्व अनुमति लेनी होगी।


🧾 फैसले की पृष्ठभूमि

जशपुर के पहाड़ी कोरवा (PVTG) आदिवासियों ने कलेक्टर कोर्ट में अपील दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि 1955-1966 के बीच मतांतरित व्यक्तियों ने उनके पूर्वजों से जमीन खरीदी, जो पूरी तरह अवैध थी। कलेक्टर रोहित व्यास ने लंबी सुनवाई के बाद सारे सौदे रद्द कर दिए।


⚖️ कानूनी आधार (मुख्य प्रावधान)

धारा 165(6) — अनुसूचित क्षेत्र में आदिवासी अपनी जमीन गैर-आदिवासी को बिना कलेक्टर की पूर्व अनुमति के नहीं बेच सकता। ऐसा हस्तांतरण शून्य माना जाता है।

धारा 170-ख — कपट, दबाव या अवैध तरीके से हुई खरीद-बिक्री पर कलेक्टर मूल स्वामी को जमीन वापस दिला सकता है।


कलेक्टर की तीखी व्याख्या

धर्म परिवर्तन के बाद व्यक्ति अपनी जनजातीय संस्कृति, रीति-रिवाज और पहचान छोड़ देता है। इसलिए वह आदिवासी संरक्षण का हकदार नहीं रहता।
👉 मतांतरित = गैर-आदिवासी


🌋 प्रभाव: सैकड़ों-हजारों एकड़ जमीन पर तहलका

जशपुर में → तत्काल 114 एकड़ जमीन पहाड़ी कोरवा आदिवासियों को वापस।

पूरे छत्तीसगढ़ में → 85 अनुसूचित विकासखंडों में हजारों एकड़ आदिवासी जमीन प्रभावित।

मुस्लिम और ईसाई मतांतरितों पर असर → उनके कई लंबित प्रकरण अब रद्द होने वाले हैं।

भविष्य में → कोई भी मतांतरित (ईसाई हो या मुस्लिम) बिना कलेक्टर अनुमति के आदिवासी जमीन नहीं खरीद या कब्जा नहीं रख सकेगा। पुराने अवैध कब्जे भी चुनौती दिए जा सकेंगे।


यह फैसला विशेष रूप से पहाड़ी कोरवा और अन्य Particularly Vulnerable Tribal Group (PVTG) समुदायों के लिए बड़ी राहत है, जिनकी जमीन दशकों से लालच, धोखे और धर्मांतरण के बाद हड़पी जाती रही।


🧭 अन्य जिलों में संभावनाएं

बलरामपुर, सरगुजा, कोरिया, सुकमा जैसे आदिवासी बहुल जिलों में धारा 170-ख के सैकड़ों प्रकरण पहले से लंबित हैं। इस फैसले के बाद मतांतरित खरीदारों पर कार्रवाई तेज होने की पूरी संभावना है।


🏛️ सरकार का रुख

भाजपा सरकार आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार सक्रिय है। यह फैसला धर्म स्वातंत्र्य कानून 2026 के साथ मिलकर अवैध धर्मांतरण + जमीन हड़पने की पूरी साजिश पर लगाम लगाएगा।


🧨 निष्कर्ष

जशपुर का यह मामला मात्र 114 एकड़ तक सीमित नहीं है। यह अन्य धर्म में गए आदिवासियों को साफ संदेश है — अब सैकड़ों-हजारों एकड़ जमीन छोड़नी पड़ेगी। आदिवासी पहचान, संस्कृति और भूमि अधिकार की रक्षा का यह ऐतिहासिक कदम है।

फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील हो सकती है, लेकिन फिलहाल यह पहाड़ी कोरवा और पूरे छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदाय के लिए बड़ी जीत है।

जय आदिवासी! जय छत्तीसगढ़!

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