प्रदेश में साड़ी घोटाला ! 🟥घटिया साड़ी करोड़ का खेल कब होगी कार्रवाई ?

प्रदेश में साड़ी घोटाला ! 🟥घटिया साड़ी करोड़ का खेल कब होगी कार्रवाई ?

🟥 HIGHLIGHTS

▪️ 9.7 करोड़ का साड़ी घोटाला
▪️ 5.5 मीटर की जगह 5 मीटर कपड़ा
▪️ राज्य भर में वापसी शुरू, भुगतान रोका गया
▪️ ठेकेदार-खादी बोर्ड जांच के घेरे में

🔥 आंगन बाड़ी बहनों के साथ साड़ी घोटाला: 9.7 करोड़ का खेल, 5.5 मीटर की जगह 5 मीटर घटिया कपड़ा थोपा, अब वापसी शुरू – ठेकेदार-खादी बोर्ड पर शिकंजा कसने की तैयारी!

The CG ख़बर | रायपुर/बिलासपुर, 11 अप्रैल 2026 – छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की यूनिफॉर्म साड़ी खरीद को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। मीडिया में खुलासा होते ही हड़कंप मच गया। शुक्रवार से पूरे प्रदेश की आंगनवाड़ी परियोजनाओं में घटिया साड़ियां वापस ली जा रही हैं। महिलाएं गुस्से में हैं – साड़ी इतनी पतली कि पारदर्शी, धोते ही रंग उतर गया, कपड़ा सिकुड़ गया और लंबाई भी कम। कई बहनों ने 100-150 रुपये खर्च कर फॉल-पीको करवा लिया था, लेकिन अब सब बेकार। विभाग ने माना – मानक अनुसार नई साड़ियां और ब्लाउज दिए जाएंगे।

किस विभागसे साड़ियों की खरीदारी की गई थी?

यह पूरी खरीदारी महिला एवं बाल विकास विभाग ने की थी। सप्लाई का जिम्मा छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को सौंपा गया। बोर्ड ने ठेकेदारों के जरिए साड़ियां खरीदीं और वितरित कीं।

साड़ियों की खरीदारी कब की गई थी?

खरीदारी वित्तीय वर्ष 2024-25 में हुई। टेंडर प्रक्रिया उसी साल पूरी हुई। अगस्त 2025 से फरवरी 2026 तक प्रदेशभर की आंगनबाड़ी केंद्रों पर साड़ियां बांटी गईं।

कितने रुपये की साड़ियां खरीदी गईं और संख्या कितनी थी ?

कुल खर्च: करीब 9.7 करोड़ रुपये।
साड़ियों की संख्या: प्रदेश की लगभग 1.94 लाख (1,94,590) आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए।
दर: प्रति साड़ी 500 रुपये।
वर्क ऑर्डर का मानक: कुल 6.3 मीटर (5.5 मीटर साड़ी + 80 सेमी ब्लाउज)।

लेकिन हकीकत उलट निकली – ज्यादातर साड़ियां सिर्फ 5 मीटर या उससे भी कम लंबी, कपड़ा पतला-पारदर्शी और घटिया क्वालिटी का।

👉 यानी आधा सच कागज पर, आधाखेल जमीन पर !

कौन-कौन इस गड़बड़ी में दोषी है ?

मुख्य आरोपी: ठेकेदार, जिन्होंने बाजार की 250 रुपये वाली साड़ी 500 रुपये में थोप दी।
खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड: सप्लाई का पूरा जिम्मा लेने के बावजूद गुणवत्ता जांच नहीं की।
महिला एवं बाल विकास विभाग: खरीद प्रक्रिया और निरीक्षण की लापरवाही।

कांग्रेस नेता दीपक बैज ने इसे “भ्रष्टाचार का अड्डा” बताया और कुछ फर्मों (सूरत से जुड़े) को फेवर देने का आरोप लगाया। अभी तक किसी अधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं, लेकिन जांच में बड़े सरगना भी सामने आ सकते हैं।

क्या-क्या कार्रवाई हुई और आगे किस-किस पर हो सकती है ?

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के निर्देश पर संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव ने तुरंत एक्शन लिया:
🔥सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों को साड़ियां वापस लेने के आदेश
🔥शुक्रवार से वापसी शुरू
🔥दोषपूर्ण साड़ियां खादी बोर्ड को लौटाई जाएंगी
🔥भुगतान रोका गया
🔥जांच कमेटी गठित – दुर्ग, धमतरी, रायगढ़, बिलासपुर समेत कई जिलों की रिपोर्ट मांगी गई
🔥नई मानक वाली साड़ियां + ब्लाउज जल्द वितरित किए जाएंगे



👉 संभावितअगला कदम:
दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्टिंग, विभागीय सजा और संभवतः FIR। अगर बड़े अधिकारियों की मिलीभगत पाई गई तो उन पर भी सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।

📢 महिलाओं की पीड़ा– जमीनी सच्चाई

महिलाओं की पीड़ा चरम पर है। बिलासपुर में 1930 से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने सामूहिक पत्र लिखा। यूनियन ने कहा –
👉 यूनिफॉर्महमारीपहचान है, घटियासाड़ीदेकर सम्मान छीना गया।”

कई बहनों ने पुरानी यूनिफॉर्म या बिना यूनिफॉर्म काम शुरू कर दिया।

🔍 नयाएंगल(जो सवाल खड़े करताहै)
◾क्या टेंडर प्रक्रिया में पहले से तय फर्मों को फायदा पहुंचाया गया?
◾क्या क्वालिटी चेक सिर्फ कागजों में पूरा हुआ?
◾क्या सप्लाई के समय फील्ड वेरिफिकेशन जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?



👉 अगर इन सवालों के जवाब “हाँ” में मिले, तो मामला सिर्फ घोटाला नहीं, संगठितभ्रष्टाचार साबित होगा।

🎯 निष्कर्ष (सीधी बात)

यह मामला सिर्फ साड़ी का नहीं, बल्कि सरकारी खरीद में गहरी सड़ांध का है।
9.7 करोड़ जनता का पैसा+ आंगनबाड़ी बहनों का सम्मान= सवालों के घेरे में सिस्टम

अब निगाहें इस पर हैं कि जांच एजेंसियां कितनी तेजी से असली दोषियों तक पहुंचती हैं।


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