
बलरामपुर में क्या हुआ?
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कोतवाली थाना में संदिग्ध परिस्थितियों में गुरु चंद मंडल नामक युवक की मौत होने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, युवक का शव कोतवाली थाना परिसर में फांसी पर लटका हुआ पाया गया था, जिसे आनन-फानन में पुलिस ने जिला अस्पताल ले जाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं को लेकर जनता और मृतक के परिवारजनों में आक्रोश है।
तनावपूर्ण माहौल और विरोध प्रदर्शन
गुरुवार की शाम से ही इस घटना को लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ता गया, और विरोध प्रदर्शन होने लगे। मृतक के परिजनों के साथ कई अन्य लोग भी अस्पताल परिसर में एकत्रित हुए और न्याय की मांग करने लगे। पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह जताते हुए लोगों ने मृतक की हत्या की आशंका जताई है। इस बीच, शुक्रवार को भी हालात तनावपूर्ण बने रहे, और पुलिस ने अन्य जिलों से भी पुलिस बल बुला लिया।
पुलिस अधिकारी के साथ तीखी बहस
इस घटना से गुस्साए लोगों ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। मृतक के परिजनों ने एडिशनल एसपी निमिषा पांडे के साथ भी तीखी बहस की। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि महिलाओं ने डंडा लेकर पुलिस अधिकारियों का पीछा किया। एडिशनल एसपी विवेक शुक्ला के साथ भी इसी प्रकार की घटना हुई, जहां परिजनों ने उनसे भी प्रश्न पूछते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
पोस्टमार्टम प्रक्रिया में देरी और न्यायिक अधिकारी की उपस्थिति
शव का पोस्टमार्टम पांच डॉक्टरों की टीम द्वारा प्रथम न्यायिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में किया गया। इस दौरान प्रशासन और परिजनों के बीच गहमागहमी बनी रही। पोस्टमार्टम के दौरान पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक अधिकारी की उपस्थिति को महत्वपूर्ण कदम माना गया, ताकि निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया जा सके।
मृतक के परिजनों की मांग: निष्पक्ष जांच हो
मृतक के परिजनों का आरोप है कि इस घटना में पुलिसकर्मी भी शामिल हो सकते हैं, और उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिजनों ने दावा किया कि गुरु चंद की हत्या हुई है और उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
निष्कर्ष: निष्पक्ष जांच की आवश्यकता
बलरामपुर जिले में इस घटना ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ लोगों के गुस्से और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए इस मामले में निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वे इस मामले में पारदर्शिता बनाए रखें ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।
