The CG ख़बर | भिलाई के खुर्सीपार से पुरैना तक की दूरी भले ही ज्यादा नहीं है, लेकिन यहां रहने वाले लोगों के लिए यह दूरी रोज़ एक मुश्किल सफर बन जाती है। अब खुर्सीपार मिनी स्टेडियम के पास बन रहा रेलवे अंडरब्रिज इस कहानी को बदलने की शुरुआत कर चुका है—और अगर इसे पुरैना से जोड़ दिया गया, तो यह बदलाव सीधे 10,000 से ज्यादा लोगों की जिंदगी में दिखाई देगा।
इसी जरूरत को समझते हुए दुर्ग ग्रामीण के विधायक ललित चंद्राकर ने 2 अप्रैल को उप मुख्यमंत्री अरुण साव को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने मांग की है कि अंडरब्रिज से स्टोरपारा पुरैना तक लगभग 1 किलोमीटर सड़क बनाई जाए, ताकि लोगों को सीधा और सुरक्षित रास्ता मिल सके।
📍 आज की सच्चाई: रास्ता नहीं… मजबूरी है
पुरैना, जो रिसाली नगर निगम के अंतर्गत आता है, चारों तरफ से रेलवे लाइन से घिरा हुआ है।
यहां के लोगों के लिए बाहर निकलना ही एक चुनौती बन जाता है।
➡️अस्पताल जाना हो तो लंबा चक्कर या खतरे भरा ट्रैक पार करना पड़ता है
➡️रोज़ ऑफिस, स्कूल के लिए सिरसा गेट का जाम झेलना पड़ता है
➡️आपात स्थिति में समय ही सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है
🛣️ अगर सड़क बनी… तो क्या बदलेगा?
यह सिर्फ एक किलोमीटर सड़क नहीं होगी, बल्कि पूरे इलाके की लाइफस्टाइल बदलने वाली कड़ी बन सकती है—
👉सीधी कनेक्टिविटी: खुर्सीपार से पुरैना तक आसान और छोटा रास्ता
👉आपातकाल में राहत: मरीजों को अस्पताल तक तेजी से पहुंचाना संभव
👉ट्रैफिक में कमी: भिलाई-3 और नेशनल हाईवे का दबाव घटेगा
👉गांवों को फायदा: सोमनी, गनियारी, पचपेड़ी, मोरिद जैसे गांवों के लिए नया रूट
👉कर्मचारियों को राहत: बीएसपी और एनएसपीसीएल के कर्मचारियों का समय बचेगा
🌉 अंडरब्रिज से आगे की सोच
अभी जो अंडरब्रिज बन रहा है, वह “L” आकार में बीएसपी की ओर खुलेगा।
लेकिन असली तस्वीर तब बदलेगी, जब यह रास्ता पुरैना तक पहुंचेगा।
👉 तब यह सिर्फ एक निर्माण नहीं रहेगा,
👉 बल्कि एक ऐसा कनेक्शन बनेगा जो शहर और लोगों की जिंदगी को जोड़ देगा।
✍️खबर आपकी है… फैसला भी आपका होना चाहिए
यह मुद्दा सिर्फ सरकारी फाइलों का नहीं है—यह उन हजारों लोगों की आवाज़ है, जो हर दिन इस परेशानी को जीते हैं।
अगर यह सड़क बनती है, तो लोग सिर्फ राहत महसूस नहीं करेंगे,
बल्कि हर दिन कहेंगे—
“अब सफर आसान है… और जिंदगी भी।”
💬 आप क्या सोचते हैं?
क्या यह सड़क बननी चाहिए?
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