
भिलाई नगर, 05 नवंबर: भोजपुरी संगीत जगत की महान गायिका शारदा सिन्हा का कल रात 9 बजकर 20 मिनट पर लंबी बीमारी के बाद दुखद निधन हो गया। वे बोन मैरो कैंसर से पीड़ित थीं, जिस कारण उन्हें बीते दिनों अस्पताल में भर्ती कराया गया था। छठ पूजा के मौके पर उनके गीतों के बिना इस पर्व का उत्सव अधूरा सा लगता है। अपनी मर्मस्पर्शी आवाज़ से छठ मईया के गीतों को जीवंत बनाने वालीं शारदा सिन्हा के निधन ने पूरे देश के संगीत प्रेमियों को शोक में डाल दिया है।
विधायक रिकेश सेन की पहल: कुरूद तालाब का नाम “शारदा सिन्हा सरोवर”
भिलाई के वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने भोजपुरी गायिका शारदा सिन्हा को श्रद्धांजलि देते हुए एक ऐतिहासिक घोषणा की है। विधायक सेन ने कहा कि शारदा सिन्हा के सम्मान में कुरूद तालाब का नामकरण “शारदा सिन्हा सरोवर” किया जाएगा। इसके अलावा, विधायक निधि से 1 करोड़ रुपये की सहायता देकर इस तालाब का पुनर्निर्माण एवं सौंदर्यीकरण किया जाएगा। रिकेश सेन ने यह भी घोषणा की कि जल्द ही इस स्थल पर शारदा सिन्हा की प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी ताकि लोग उन्हें हमेशा याद रख सकें।
भोजपुरी संगीत जगत को अपूरणीय क्षति
बिहार के सुपौल जिला के हुलास गांव में 1 अक्टूबर 1952 को जन्मीं शारदा सिन्हा ने 1970 में बिहार शिक्षा सेवा के अधिकारी ब्रज किशोर सिन्हा से विवाह किया था। शारदा सिन्हा ने प्रोफेसर के रूप में भी सेवा की और 5 साल पहले रिटायर हुई थीं। अपने गीतों के माध्यम से वे ना केवल छठ पर्व का अभिन्न हिस्सा बनीं, बल्कि उन्होंने भारतीय लोकगीतों को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया।
उनके प्रसिद्ध छठ गीतों में से कुछ इस प्रकार हैं:
- “कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए”
- “केलवा के पात पर उगेलन सुरुजमल झांके झुके”
- “उग हो सूरज देव”, “उगिहें सूरज गोसईयां हो”
- “पहिले पहिल हम कईनी”, “छठी मईया व्रत तोहार”
इन गीतों ने न केवल छठ पूजा को एक खास महत्व दिया, बल्कि लोगों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी। शारदा सिन्हा का गाना ‘हो दीनानाथ’ भी बहुत प्रसिद्ध है, जो कि छठ पर्व पर सुना जाता है। इस गाने और एल्बम के संगीत निर्देशन और लेखन का श्रेय भी शारदा सिन्हा को ही जाता है।
शारदा सिन्हा: छठ गीतों की अद्वितीय गायिका
छठ पूजा के अवसर पर शारदा सिन्हा का छठ गीत ‘हे छठी मईया’ देश के सबसे लोकप्रिय गीतों में से एक है। इसके साथ ही उनका नया गीत ‘दुखवा मिटाईं छठी मईया’ जो उन्होंने एम्स में अपनी बीमारी के दौरान साझा किया था, आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। इस गीत का वीडियो उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी साझा किया गया है, और उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए लोगों ने प्रार्थनाएं की थीं।
शारदा सिन्हा सरोवर के माध्यम से स्मृति को अमर रखना
शारदा सिन्हा के योगदान को भिलाई के कुरूद तालाब के नाम पर अमर करने की विधायक रिकेश सेन की यह पहल पूरे भारतवर्ष के संगीत प्रेमियों के लिए एक श्रद्धांजलि के रूप में है। शारदा सिन्हा सरोवर में उनकी प्रतिमा की स्थापना न केवल उनकी स्मृति को जीवित रखेगी बल्कि उनकी संगीतमय धरोहर को भी संजोए रखेगी।
शारदा सिन्हा के निधन से भोजपुरी संगीत को जो क्षति हुई है, वह अपूरणीय है। भारतीय संगीत के इस महान स्वर को हर छठ पर्व पर याद किया जाएगा और उनके गीत हमेशा देशवासियों के दिलों में बसी रहेंगी।
