“दो महीने में नकटा तालाब की बदली है तस्वीर” कुरूद सरोवर का निरीक्षण करने पहुंचे विधायक रिकेश सेन,

“दो महीने में नकटा तालाब की बदली है तस्वीर” कुरूद सरोवर का निरीक्षण करने पहुंचे विधायक रिकेश सेन,

“दो महीने में नकटा तालाब की बदली है तस्वीर” कुरूद सरोवर का निरीक्षण करने पहुंचे विधायक रिकेश सेन,

तालाब का महत्व सभी जाति और धर्मों के लिए

तालाब सदियों से प्राकृतिक संसाधनों का महत्वपूर्ण स्रोत रहे हैं। यह सभी जाति और धर्मों के लिए जीवनदायिनी होते हैं। हमारे समाज में तालाबों का उपयोग धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यों के लिए होता रहा है। हाल ही में, वैशाली नगर के विधायक रिकेश सेन ने कुरूद के नकटा तालाब का छठ पूजा पूर्व निरीक्षण किया और इसके विकास पर ज़ोर दिया।

दो महीने में बदली नकटा तालाब की तस्वीर

दो महीने पहले यह तालाब गंदगी और जलकुंभी से अटा हुआ था। विधायक रिकेश सेन ने इसकी सफाई के आदेश दिए थे और छठ पूजा से पहले इसे व्यवस्थित करने का निर्देश दिया था। अब यह तालाब बेहतरीन प्रकाश व्यवस्था और सफाई के साथ तैयार हो चुका है, जिससे छठ पूजा के साथ अन्य तीज त्यौहारों का आयोजन आसानी से किया जा सकेगा।

भावी योजनाएँ और सुविधाएँ

विधायक सेन ने कहा कि जल्द ही तालाब में वाटर रीचार्ज और बोटिंग जैसी सुविधाएँ शुरू की जाएंगी। इस प्रकार यह क्षेत्र न केवल धार्मिक आयोजनों के लिए बल्कि पर्यटन के लिए भी प्रसिद्ध होगा। कुरूद तालाब को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए अधोसंरचना मद से एक करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है। इसमें हाई मास्क लाइट लगाई जाएगी ताकि रात के समय भी यह तालाब आकर्षण का केंद्र बने।

सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान

विधायक सेन ने विभिन्न धार्मिक हस्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि कुरूद नकटा तालाब का नाम “शारदा सरोवर” रखा जाएगा। उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा कि इस तालाब के तट पर मां शारदा का मंदिर है, और इसलिए शारदा सिन्हा जैसी महान कलाकारों को सम्मान देने के लिए यह नाम उपयुक्त रहेगा।

छत्तीसगढ़ी संस्कृति का समर्थन

विधायक सेन ने कहा कि वह स्वयं एक छत्तीसगढ़ी परिवार से हैं और तालाब का महत्व समझते हैं। उन्होंने कहा, “तालाब की यह व्यवस्था सभी जाति और धर्मों के लिए है।” यहां तीज और छठ पूजा जैसे महापर्वों का आयोजन होता है, जो छत्तीसगढ़ और अन्य भारतीय समुदायों में महत्वपूर्ण है। अब तालाब की बेहतर स्थिति से स्थानीय महिलाएं और श्रद्धालु यहां आराम से स्नान कर सकेंगे।

तालाब का नामकरण और स्थानीय भावनाएँ

श्री सेन ने कहा कि शारदा सरोवर नाम का प्रस्ताव रखा गया है। अगर स्थानीय लोग इसका विरोध करेंगे, तो उनकी भावनाओं का भी ध्यान रखा जाएगा। उनका मानना है कि लोकल भावनाओं के साथ तालमेल बनाना बहुत जरूरी है, इसलिए सामंजस्य से इस नाम का निर्णय लिया जाएगा।

निष्कर्ष

तालाब का संरक्षण और विकास समाज के लिए आवश्यक है। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान देते हैं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहरों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। कुरूद तालाब के विकास की यह पहल निश्चित ही स्थानीय लोगों के लिए लाभकारी साबित होगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

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