
जिले में मुख्यमंत्री जतन योजना के अंतर्गत मरम्मत के नाम पर स्कूलों में घटिया निर्माण के मामले प्रकाश में आए हैं। इस मामले की जांच कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी द्वारा गठित टीम ने की, जिसमें 17 से अधिक स्कूलों में घटिया निर्माण की पुष्टि हुई। यह देखा गया कि ठेकेदारों ने टाइल्स और छत की मरम्मत में निम्न स्तर का सामग्री का प्रयोग किया था। इसके परिणामस्वरूप छत की सीपेज की समस्या बनी रही। कलेक्टर के निर्देश पर संबंधित ठेकेदारों को नोटिस जारी किया गया है, और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री जतन योजना का उद्देश्य
मुख्यमंत्री जतन योजना का उद्देश्य पुराने और जर्जर हो चुके स्कूलों का समय पर मरम्मत करना था, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर पढ़ाई का माहौल मिल सके। पिछले वर्ष 2023 में राज्य शासन ने इस योजना के तहत जिले में 780 स्कूलों के मरम्मत के लिए 47 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी थी।
हालांकि, निकायों और आरईएस विभाग की लापरवाही के कारण यह मरम्मत समय पर नहीं हो पाई, जिससे बच्चों को कंडम और असुरक्षित स्कूलों में पढ़ाई करने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है।
17 स्कूलों की मरम्मत में गड़बड़ी का खुलासा
जांच में यह बात सामने आई कि 17 स्कूलों में मरम्मत कार्य में गड़बड़ी की गई है। ठेकेदारों ने घटिया सामग्री का प्रयोग किया और कार्य को अधूरा छोड़ दिया, जिसके कारण स्कूलों की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ।
ठेकेदारों को नोटिस और भविष्य की कार्रवाई
जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने बताया कि घटिया निर्माण की रिपोर्ट मिलने के बाद ठेकेदारों को नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस के जवाब के बाद ठेकेदारों पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मरम्मत की स्वीकृति और असफलता की वजहें
राज्य शासन द्वारा जिले के करीब 710 स्कूलों की मरम्मत और अतिरिक्त कक्ष बनाने के लिए 46 करोड़ 79 लाख रुपए की मंजूरी दी गई थी। 2023 के ग्रीष्मकाल में यह स्वीकृति जारी की गई थी, लेकिन कार्य में देरी और घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग इन समस्याओं का मुख्य कारण बना। नगर निगम दुर्ग और आरईएस को इस कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन उनकी लापरवाही के कारण बच्चों को असुरक्षित स्कूलों में पढ़ाई करनी पड़ रही है।
महात्मा गांधी स्कूल में अधूरा निर्माण कार्य
दुर्ग शहर के महात्मा गांधी स्कूल का निर्माण कार्य अब तक अधूरा है। यहां दरवाजों की कमी, बिजली और पंखे का अभाव है, जबकि मरम्मत कार्य भी अधूरा है। स्कूल के प्रधानाचार्य का कहना है कि मरम्मत कार्य धीरे-धीरे हो रहा है, लेकिन अभी तक पूरी तरह से संपन्न नहीं हो सका है।
बिना टेंडर के काम का आवंटन
नगर निगम दुर्ग द्वारा बिना टेंडर के ही स्कूलों के मरम्मत कार्य का आवंटन किया गया था, जिसे लेकर कई सवाल खड़े हुए। इस मुद्दे पर किसी प्रकार की जांच या कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे कई लोगों में रोष है।
मुख्य बिंदु
- मुख्यमंत्री जतन योजना के तहत 780 स्कूलों के लिए 47 करोड़ का बजट।
- 17 से अधिक ठेकेदारों को नोटिस घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग।
- जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार, ठेकेदारों पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- महात्मा गांधी स्कूल जैसे अन्य कई स्कूलों का कार्य अधूरा।
- नगर निगम द्वारा बिना टेंडर के मरम्मत कार्य का वितरण।
ख़बर का सार
मुख्यमंत्री जतन योजना का उद्देश्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में मरम्मत और सुधार कार्य कराना था, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर माहौल मिल सके। लेकिन प्रशासन की लापरवाही और ठेकेदारों की घटिया सामग्री के प्रयोग ने इस उद्देश्य को धूमिल कर दिया।
