
महाराष्ट्र में कांग्रेस नेता भाई जगताप के बयान ने राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है। उन्होंने चुनाव आयोग पर विवादित टिप्पणी करते हुए उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निवास पर बैठे कुत्ते की उपमा दी। उनके इस बयान पर विपक्षी दल भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
जगताप के विवादित बयान पर बवाल
भाई जगताप ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा,
“अगर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं तो चुनाव आयोग को जवाब देना होगा। लेकिन चुनाव आयोग और अन्य एजेंसियां कुत्ता बनकर प्रधानमंत्री मोदी के बंगले के बाहर बैठी रहती हैं।”
उनके इस बयान से राजनीतिक गलियारों में हंगामा मच गया।
भाजपा का पलटवार
भाजपा नेता किरीट सोमैया ने इस बयान को लेकर मुंबई पुलिस कमिश्नर से शिकायत दर्ज कराई। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर इस मामले में उचित कार्रवाई की मांग की। सोमैया ने कहा,
“एक संवैधानिक संस्था का ऐसा अपमान बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) जैसी पार्टियां 2025 के मुंबई नगर निगम चुनाव से पहले ईवीएम और चुनाव आयोग को निशाना बना रही हैं।”
उन्होंने इसे कांग्रेस की हताशा और डर का परिणाम बताया।
जगताप का जवाब: बयान पर कायम
शिकायत दर्ज होने के बावजूद, भाई जगताप अपने बयान पर अडिग हैं। उन्होंने कहा,
“ये वही किरीट सोमैया हैं जो ईवीएम के खिलाफ बोलते थे। मुझे अपने बयान का कोई अफसोस नहीं है और मैं उस पर कायम हूं।”
सोमैया ने की सख्त कार्रवाई की मांग
सोमैया ने कहा कि कांग्रेस नेता का बयान संविधान और लोकतंत्र का अपमान है। उन्होंने कहा,
“ऐसे बयान लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करते हैं। चुनाव आयोग जैसी संस्था पर भरोसा जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की नींव है।”
भाजपा का कहना है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनावी नतीजों को लेकर पहले ही आशंकित हैं और इसी वजह से वे चुनावी संस्थाओं को निशाना बना रहे हैं।
क्या है कांग्रेस की रणनीति?
कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) का यह बयान आगामी 2025 मुंबई नगर निगम चुनाव के मद्देनजर एक राजनीतिक चाल माना जा रहा है। विपक्षी पार्टियां भाजपा की ताकत को कमजोर करने के लिए हर संभव हथकंडा अपना रही हैं।
राजनीतिक विवाद का असर
जगताप के बयान ने न केवल भाजपा बल्कि अन्य राजनीतिक और सामाजिक संगठनों को भी उनके खिलाफ खड़ा कर दिया है। इस बयान के जरिए कांग्रेस और भाजपा के बीच पहले से ही जारी खींचतान और तेज हो गई है।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर भी जगताप के बयान की आलोचना हो रही है। भाजपा समर्थकों ने इसे कांग्रेस की ‘बौखलाहट’ बताया है, जबकि कांग्रेस समर्थकों ने इसे सत्ता की आलोचना का साहसिक कदम करार दिया।
संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा पर सवाल
जगताप का बयान चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की गरिमा पर सवाल खड़ा करता है। यह सवाल उठता है कि राजनीतिक दल किस हद तक बयानबाजी में मर्यादा का पालन करते हैं।
भविष्य में क्या होगा?
इस मामले ने कानूनी मोड़ ले लिया है। भाजपा की शिकायत पर कार्रवाई की संभावना है, जबकि कांग्रेस इस मुद्दे पर खुलकर डटने का इशारा दे रही है।
. अब आगे क्या ?
भाई जगताप का बयान एक संवेदनशील मुद्दा बन चुका है, जो चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच भरोसे की खाई को और गहरा कर सकता है। आगामी चुनावों में यह विवाद कितनी बड़ी भूमिका निभाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा
