धान खरीद: जनपद की सामान्य सभा में धान खरीदी को लेकर मचा बवाल

शुक्रवार को जनपद पंचायत दुर्ग में आयोजित सामान्य सभा बैठक किसानों के मुद्दों पर हंगामेदार रही। धान खरीदी में हो रही अव्यवस्थाओं को लेकर जनपद सदस्यों ने जमकर नाराजगी जाहिर की।

धान खरीदी में ऑनलाइन टोकन की समस्या

सदस्यों ने बताया कि किसानों को ऑनलाइन टोकन के लिए घंटों च्वाइस सेंटर पर इंतजार करना पड़ रहा है। सर्वर समस्या के कारण टोकन समय पर नहीं कट रहे, जिससे किसान परेशान हैं।

जनपद अध्यक्ष देवेंद्र देशमुख ने सुझाव दिया कि धान खरीदी में ऑनलाइन टोकन के साथ ऑफलाइन टोकन व्यवस्था भी लागू की जाए। इससे किसानों को राहत मिलेगी।

छोटे किसानों की समस्याएं

बैठक में यह भी बताया गया कि छोटे किसानों को धान विक्रय में ट्रांसपोर्टिंग का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है। साथ ही धान में करगा (दाना टूटने) की शिकायतों के चलते किसानों का धान स्वीकार नहीं किया जा रहा।
सदस्य रूपेश देशमुख ने कहा,

“किसान जिस बीज से उत्पादन कर रहे हैं, उसी में करगा निकल रहा है। फिर भी किसानों को छांटने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”

निरीक्षण के लिए टीम का गठन

कृषि सभापति राकेश हिरवानी ने धान खरीदी व्यवस्था की जमीनी हकीकत जानने के लिए निरीक्षण समिति गठित करने का सुझाव दिया।

ग्रामीण विकास योजनाओं में गड़बड़ियां

पेयजल योजनाओं में तीन अलग-अलग मदों से राशि स्वीकृत होने पर जनपद सदस्य रूपेश देशमुख ने सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अमृत मिशन, समूह नल जल योजना और जल जीवन मिशन में एक ही गांव के लिए तीन योजनाओं को स्वीकृति क्यों दी गई।
विधायक ललित चंद्राकर ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा:

“स्पष्ट जवाब न देना यह दिखाता है कि आप क्षेत्र का सही निरीक्षण नहीं करते।”

प्रमुख निर्णय और निर्देश

  • ऑफलाइन टोकन प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा जाएगा।
  • धान खरीदी में पारदर्शिता और किसानों की सुविधा के लिए जनपद सदस्यों की निरीक्षण टीम काम करेगी।
  • ग्रामीण विकास योजनाओं में धन के सही उपयोग की जानकारी विभागीय अधिकारियों से ली जाएगी।

बैठक में मौजूद सदस्य और अधिकारी

जनपद उपाध्यक्ष झमित गायकवाड़, सभापति टिकेश्वरी देशमुख, सदस्य हरेंद्र देव घृतलहरे, सरस्वती सेन, नोहर साहू, और अन्य अधिकारी बैठक में उपस्थित रहे।

किसानों की समस्याएं और विकास योजनाओं की खामियां इस बैठक में केंद्र बिंदु रहीं। अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग इन मुद्दों को हल करने के लिए कितने प्रभावी कदम उठाते हैं।

“किसान देश की रीढ़ हैं, और उनकी समस्याओं का समाधान हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।”

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