
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास का कार्यकाल 10 दिसंबर 2024 को समाप्त हो रहा है। उनके उत्तराधिकारी को लेकर अटकलों का दौर समाप्त हो गया है। अब यह स्पष्ट हो चुका है कि संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) को भारतीय रिजर्व बैंक का नया गवर्नर नियुक्त किया गया है।
इस खबर ने भारतीय वित्तीय क्षेत्र में हलचल मचा दी है, क्योंकि शक्तिकांत दास का कार्यकाल कई ऐतिहासिक आर्थिक निर्णयों से भरा रहा है।
संजय मल्होत्रा कौन हैं?
संजय मल्होत्रा, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के राजस्थान कैडर से हैं। उनका करियर उत्कृष्ट प्रशासनिक अनुभव से भरा है। उन्होंने भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवा विभाग के सचिव के तौर पर काम किया है।
उनके पास कर और वित्तीय मामलों का गहरा अनुभव है, जो उन्हें आरबीआई गवर्नर जैसे बड़े पद के लिए एक योग्य उम्मीदवार बनाता है।
प्रमुख जिम्मेदारियां:
- केंद्र और राज्य सरकारों में कर और वित्तीय नीतियों का संचालन।
- वित्तीय सेवा क्षेत्र में सुधार और प्रबंधन।
- आर्थिक स्थिरता के लिए नीतियां बनाना।
मल्होत्रा को ही चुना गया अगला गवर्नर?
आपको बता दें कि शक्तिकांत दास का कार्यकाल भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में 2018 में शुरू हुआ था. उनके कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णय लिए गए. हालांकि, केंद्र सरकार ने उनके कार्यकाल में कोई विस्तार करने का निर्णय नहीं लिया. ऐसे में संजय मल्होत्रा की नियुक्ति की गई और यह फैसला वित्तीय सेवा क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए लिया गया है.
क्यों महत्वपूर्ण है यह नियुक्ति?
1. शक्तिकांत दास का प्रभावशाली कार्यकाल:
2018 में आरबीआई गवर्नर का पद संभालने वाले शक्तिकांत दास ने:
- कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक संकट को कुशलता से प्रबंधित किया।
- डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए नीतियां लागू कीं।
- मुद्रास्फीति और विकास के बीच संतुलन बनाए रखा।
हालांकि, केंद्र सरकार ने उनके कार्यकाल को और आगे बढ़ाने का निर्णय नहीं लिया।
2. नई उम्मीदें संजय मल्होत्रा से:
संजय मल्होत्रा की नियुक्ति यह दर्शाती है कि सरकार ने उनकी विशेषज्ञता और अनुभव को मान्यता दी है।
उनकी नियुक्ति से उम्मीद की जा रही है कि वह:
- भारत की आर्थिक वृद्धि को और गति देंगे।
- बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में सुधार करेंगे।
- अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संबंधों को मजबूत करेंगे।
अगले तीन वर्षों के लिए नई जिम्मेदारी
संजय मल्होत्रा को तीन वर्षों के लिए आरबीआई गवर्नर के रूप में नियुक्त किया गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि वह भारतीय अर्थव्यवस्था को किस दिशा में ले जाते हैं।
उनके कार्यक्षेत्र में मुख्य चुनौतियां होंगी:
- मुद्रास्फीति पर नियंत्रण।
- बैंकों की कार्यक्षमता में सुधार।
- डिजिटल करेंसी और फिनटेक सेक्टर को बढ़ावा देना।
संजय मल्होत्रा की नियुक्ति का वित्तीय बाजार पर प्रभाव
शेयर बाजार की प्रतिक्रिया:
संजय मल्होत्रा की नियुक्ति की खबर के बाद शेयर बाजार में सकारात्मक उछाल देखने को मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक स्थिरता का संकेत है।
विदेशी निवेशकों की उम्मीदें:
नए गवर्नर के तौर पर मल्होत्रा विदेशी निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद चेहरा साबित हो सकते हैं।
भविष्य की नीतियों पर नजर
भारतीय रिजर्व बैंक में नीतिगत बदलाव संभावित हैं, क्योंकि संजय मल्होत्रा अपनी विशेषज्ञता के बल पर नई पहल शुरू कर सकते हैं।
संभावित सुधार क्षेत्र:
- मुद्रा नीति में स्थिरता: लघु और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए ठोस कदम उठाना।
- स्मॉल फाइनेंस बैंकिंग: ग्रामीण इलाकों में वित्तीय सेवाओं को विस्तार देना।
- क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल करेंसी: इस क्षेत्र में आरबीआई की रणनीति को स्पष्ट करना।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि संजय मल्होत्रा के पास जो अनुभव है, वह भारतीय वित्तीय क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।
“संजय मल्होत्रा का गवर्नर बनना सही दिशा में लिया गया कदम है। उनके नेतृत्व में भारत की वित्तीय प्रणाली अधिक मजबूत और स्थिर होगी।”
– प्रमुख अर्थशास्त्री
निष्कर्ष
संजय मल्होत्रा की नियुक्ति भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव है। उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता से भारतीय रिजर्व बैंक को नई दिशा मिलेगी।
आने वाले समय में उनके फैसले यह तय करेंगे कि वह शक्तिकांत दास की विरासत को किस प्रकार आगे बढ़ाते हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक के नए गवर्नर के रूप में संजय मल्होत्रा का आगमन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक नई शुरुआत है।
