प्रशासन की नाकामी: खरीदी  केंद्रों में ताले लगने शुरू, 2 दिन में 7 मिलर्स ने उठाया केवल 547 क्विंटल धान

प्रशासन की नाकामी: खरीदी केंद्रों में ताले लगने शुरू, 2 दिन में 7 मिलर्स ने उठाया केवल 547 क्विंटल धान

प्रशासन की नाकामी: खरीदी  केंद्रों में ताले लगने शुरू, 2 दिन में 7 मिलर्स ने उठाया केवल 547 क्विंटल धान


🔴 खरीदी केंद्रों की अव्यवस्था और बढ़ती समस्याएं

दुर्ग जिले के खरीदी केंद्रों की हालत दिनोंदिन बदतर होती जा रही है। धान का समय पर उठाव न हो पाने की वजह से कई केंद्रों पर खरीदी पूरी तरह बंद हो गई है। नगपुरा, भेड़सर, और दमौदा जैसे प्रमुख केंद्रों में ताले तक नहीं खुले।15 केंद्रों में भी खरीदी बंद करने की चेतावनी दी है। अन्य केंद्र भी इस सप्ताह के खरीदी बंद कर देंगे।


🟢 क्या कह रहे हैं आंकड़े?

धान की खरीदी और उठाव की स्थिति (क्विंटल में):

दिनांककिसान (औसतन प्रति दिन)खरीदी की गई धानउठाव की स्थिति
पिछले 26 दिन3,500 से 4,000 किसान19,24,115केवल 547 (2 दिन में)
अनुबंधित धान40,77,28043,980 के ऑर्डर जारी

महज 7 मिलर्स ने धान का उठाव किया, जबकि 93 मिलर्स से अनुबंध किए गए हैं।


🟡 प्रमुख समस्याएं:

1. धान का उठाव धीमा

  • प्रशासन ने 104 मिलर्स के आवेदन स्वीकार किए।
  • 43,980 क्विंटल के डिलीवरी ऑर्डर जारी किए गए, लेकिन 2 दिन में सिर्फ 547 क्विंटल धान का उठाव।
  • मिलर्स के रुख पर प्रशासन की गंभीरता सवालों के घेरे में है।

2. भंडारण और वाहन की कमी

  • नगपुरा, भेड़सर, और दमौदा केंद्रों पर वाहनों की अनुपलब्धता।
  • समिति प्रबंधकों ने खरीदी रोक दी, लेकिन अधिकारी समाधान देने में असफल।

3. टोकन वितरण में दिक्कतें

  • 15 जनवरी तक का टोकन वितरण बंद।
  • छोटे किसानों को भी सीमित विकल्प मिल रहे हैं।
  • बड़ी संख्या में किसान भटकने पर मजबूर।

🔵 केंद्रों की स्थिति पर एक नज़र:

केंद्रभंडारित धान (क्विंटल)
डीडाभाठा34,050.40
बटरेल33,269.20
फूडा32,698.40
सेलूद32,436.40
औधी31,154.40
डोड़की30,988.40
जामगांव (आर)28,870.40
रहटादाह28,214.00
फेकारी27,746.80
नगपुरा27,096.00

सूरत-ए-हाल: अधिकांश केंद्रों पर भंडारण सीमा पार।


🔴 नगपुरा, भेड़सर, दमौदा: ताले और इंतजार

खरीदी ठप:

  • लगातार दूसरे दिन केंद्रों पर ताले।
  • वाहन भेजने का प्रशासन का वादा अधूरा।
  • मंगलवार तक किसी भी केंद्र पर वाहन नहीं पहुंचा।

सांतरा की स्थिति:

  • तौल और भंडारण की कमी के चलते मंगलवार को खरीदी बंद।
  • स्थिति देखने कोई अधिकारी तक नहीं पहुंचा।

🟠 प्रशासन के पास क्या है समाधान?

  1. मिलर्स की जिम्मेदारी तय करें:
    अनुबंधित मिलर्स को जल्द से जल्द उठाव सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करें।
  2. भंडारण समस्या का हल:
    वैकल्पिक भंडारण केंद्रों की व्यवस्था की जाए।
  3. टोकन प्रक्रिया में सुधार:
    सभी किसानों को सुलभ टोकन वितरण प्रणाली दी जाए।

क्या कहते हैं किसान?

“धान लेकर खरीदी केंद्रों पर आते हैं, लेकिन भंडारण की कमी के चलते हमें हर बार वापस लौटना पड़ता है। प्रशासन को तुरंत कदम उठाने चाहिए।” – स्थानीय किसान


“अगर यही स्थिति रही तो दुर्ग जिले के किसान आने वाले दिनों में कठिनाइयों का सामना करेंगे।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *