
भिलाई। लंबे समय से प्रतीक्षित भिलाई जिला भाजपा मंडल अध्यक्षों की सूची आखिरकार जारी कर दी गई है। यह सूची भाजपा संगठन की ओर से गहन विचार-विमर्श और बैठक के बाद जारी की गई, जिसमें भिलाई जिले के 13 मंडलों के अध्यक्षों का नाम शामिल है।
भिलाई जिले में 13 मंडल, कुछ बदलाव भी शामिल
भिलाई जिले में कुल 13 मंडल हैं। इस बार की सूची में प्रमुख बदलाव यह है कि रिसाली और कुम्हारी मंडल को भिलाई भाजपा जिला से अलग कर दिया गया है, जबकि अहिवारा, जेवरा सिरसा और मुरमूनंदा मंडल को जोड़ा गया है। यह बदलाव संगठन की संरचना को और मजबूत करने के लिए किया गया है।
मंडल अध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया
मंडल अध्यक्षों के नाम तय करने के लिए संगठन की ओर से तीन-तीन नामों के पैनल भेजे गए थे। पैनल बनाने के लिए पिछले दिनों भाजपा कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें वरिष्ठ नेताओं और पार्टी के पदाधिकारियों ने भाग लिया।
सांसद और विधायकों की भूमिका
सूची तैयार करने में सांसद, विधायकों और पूर्व मंत्रियों के समर्थकों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। यह सूची पार्टी की रणनीति को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है ताकि संगठन के कार्यों में सामंजस्य बना रहे।
मंडल अध्यक्षों की नई सूची
भाजपा ने जिन व्यक्तियों को मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है, उनकी सूची निम्नलिखित है:
- कुम्हारी: धर्मेंद्र सिन्हा
- चरोदा: ए. गौरीशंकर
- भिलाई-3: वरुण यादव
- जामुल: प्रशांत गुप्ता
- खुर्सीपार: धर्मेंद्र सिंह
- पूर्व मंडल: खिलावन रोहित साहू
- पश्चिम मंडल: गोल्डी सोनी
- सुपेला: दीपक भोंडवकर
- वैशालीनगर: शशि भगत
- कोहका: अभी घोषणा नहीं
- कैम्प: तरुण सिंह
भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह
इस सूची के जारी होने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति को आगामी चुनावों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भविष्य की रणनीति
भाजपा का मानना है कि नए मंडल अध्यक्ष संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करेंगे और पार्टी के उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाएंगे। इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने युवा और अनुभवी कार्यकर्ताओं का तालमेल बिठाने की कोशिश की है।
भाजपा के जिला अध्यक्ष ने कहा कि नए मंडल अध्यक्ष जल्द ही अपने-अपने क्षेत्रों में संगठनात्मक कार्यों को गति देंगे और आगामी चुनावी तैयारियों को मजबूत करेंगे।
निष्कर्ष:
भिलाई में भाजपा की इस नई पहल से संगठन को मजबूती मिलेगी और यह पार्टी की आगामी रणनीतियों को सुदृढ़ करने का आधार बनेगी। अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि नए मंडल अध्यक्ष अपने क्षेत्रों में किस प्रकार से संगठन का संचालन करते हैं।
