कठोर कदम: चायनीज मांझा की बिक्री पर प्रतिबंध 🟧 वैशाली  नगर विधायक रिकेश सेन ने आईजी से की कड़ी कार्रवाई की अपील

कठोर कदम: चायनीज मांझा की बिक्री पर प्रतिबंध 🟧 वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने आईजी से की कड़ी कार्रवाई की अपील

कठोर कदम: चायनीज मांझा की बिक्री पर प्रतिबंध 🟧 वैशाली  नगर विधायक रिकेश सेन ने आईजी से की कड़ी कार्रवाई की अपील

भिलाई नगर, 30 दिसंबर: वैशाली नगर विधायक, श्री रिकेश सेन ने दुर्ग रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग से मुलाकात कर प्रतिबंधित चायनीज मांझा की खरीदी और बिक्री करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है। इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान, विधायक ने कहा कि चायनीज मांझा के प्रयोग से न केवल पक्षी, बल्कि मनुष्यों के लिए भी गंभीर खतरे उत्पन्न हो रहे हैं, जो समाज के लिए चिंता का विषय है।

चायनीज मांझे का खतरा:

विधायक ने बताया कि क्षेत्र में हाल ही में जानकारी मिली है कि चायनीज मांझा पुनः बाजारों में पाया जा रहा है, जो की एक जानलेवा खतरा बन चुका है। पतंग उड़ाने की परंपरा भारतीय संस्कृति का हिस्सा है, लेकिन इस जानलेवा मांझे का उपयोग पशु-पक्षियों और मनुष्यों के लिए विनाशकारी साबित हो रहा है। ऐसे मांझे से होने वाली दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए उन्होंने इस मामले में तत्काल दखल देने की आवश्यकता महसूस की।

राष्ट्रीय प्रतिबंध और इसके प्रभाव:

वर्ष 2017 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने चायनीज मांझे की बिक्री पर देशभर में प्रतिबंध लगा दिया था। पीपल्स फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) की याचिका पर यह आदेश जारी किया गया था। इसके बावजूद, कुछ कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में राहत की मांग की थी, लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिली। चायनीज मांझे की चपेट में आने से दुर्घटनाओं की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिनमें पुलिस अक्सर अनट्रेस रिपोर्ट दर्ज करती रही है।

कड़ी कार्रवाई की मांग:

विधायक रिकेश सेन ने आईजी से चर्चा के बाद बताया कि पहले आईपीसी की धारा 188 (सरकारी आदेश की अवहेलना) के तहत मामूली सजा दी जाती थी, जिसमें अधिकतम एक महीने की सजा या 200 रुपये जुर्माना लगाया जाता था। अब, भारतीय न्याय संहिता (BNS) 223 (बी) के तहत केस दर्ज किए जाएंगे, जिसके तहत दोषियों को एक साल की सजा या 5000 रुपये जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इसके अलावा, बीएनएस की धारा 223 (ए) के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें छह महीने की सजा या 2500 रुपये जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन एक्ट:

इस मुद्दे पर और भी कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता को देखते हुए पुलिस के पास अब एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन एक्ट के तहत कार्रवाई करने का विकल्प भी मौजूद है। विधायक ने क्षेत्र के व्यावसायियों से भी अपील की है कि वे इस जानलेवा चायनीज मांझे की बिक्री और खरीदी में लिप्त न हों।

मकर संक्रांति के दौरान सुरक्षा की आवश्यकता:

विधायक ने विशेष रूप से मकर संक्रांति और अन्य त्योहारों के दौरान चायनीज मांझे के बढ़ते उपयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पक्षियों के लिए ही नहीं, बल्कि सड़क पर चलने वाले लोगों और दुपहिया वाहनों पर सवार राहगीरों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है।

निष्कर्ष:

वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन की पहल चायनीज मांझे की बिक्री पर रोक लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल पर्यावरण की सुरक्षा को सुनिश्चित करता है, बल्कि समाज के सभी वर्गों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है। अब, पुलिस और संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि ऐसे खतरनाक व्यापारों पर पूरी तरह से अंकुश लगाया जा सके।

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