निजी स्कूलों में हड़क  📚 “किताब-ड्रेस के खेल पर वार! 5 साल का हिसाब मांगेगा प्रशासन

निजी स्कूलों में हड़क  📚 “किताब-ड्रेस के खेल पर वार! 5 साल का हिसाब मांगेगा प्रशासन

Bhilai-Durg |The CG ख़बर |  EXCLUSIVE | दुर्ग जिले के निजी स्कूलों में अब “मनमानी मॉडल” पर बड़ा झटका लगने वाला है। किताबों, यूनिफॉर्म और बस किराए के नाम पर अभिभावकों से वसूली की लगातार शिकायतों के बाद प्रशासन ने सीधे एक्शन मोड में आकर पिछले 5 साल का रिकॉर्ड खंगालने का फैसला लिया है।
          पिछले कुछ समय से अभिभावकों में नाराजगी खुलकर सामने आ रही थी। उनका कहना था कि हर साल नई किताबें, नई यूनिफॉर्म और तय दुकानों से खरीदने का दबाव—बच्चों की पढ़ाई से ज्यादा खर्च का बोझ बन चुका है।

इसी बढ़ते दबाव और शिकायतों के बीच जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने अब सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने जिले के सभी नोडल प्राचार्यों और सरकारी स्कूल प्रमुखों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र के निजी स्कूलों की पूरी जानकारी इकट्ठा करें और तय समय सीमा में रिपोर्ट सौंपें।

जांच में क्या-क्या खंगाला जाएगा (फोकस पॉइंट्स)

👉 इस पूरी कार्रवाई का फोकस सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि सिस्टम की जड़ तक जाने वाला है:

➡️वेबसाइट पारदर्शिता:
क्या स्कूलों ने किताबों की पूरी सूची अपनी वेबसाइट पर अपलोड की? अगर हां, तो कब?

➡️बार-बार बदलाव का पैटर्न:

2022 से 2027 के बीच कितनी बार किताबें और यूनिफॉर्म बदली गईं?

➡️तय दुकानों का दबाव:

क्या अभिभावकों को एक ही दुकान से खरीदारी करने के लिए मजबूर किया गया?

🎯 DEO का सख्त स्टैंड (सबसे बड़ा मैसेज)
जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने इस मामले पर साफ और कड़ा संदेश दिया है—

“निजी स्कूलों द्वारा किताबों, ड्रेस और बस किराए में मनमानी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अभिभावकों की शिकायतों के आधार पर पिछले 5 साल के रिकॉर्ड की जांच के आदेश दिए गए हैं। सभी नोडल प्राचार्यों को 13 अप्रैल तक रिपोर्ट सौंपनी होगी, ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।”


🔥यानी साफ संकेत—इस बार सिर्फ चेतावनी नहीं, कार्रवाई तय मानी जा रही है।

🔍 क्यों अहम है यह जांच? (ग्राउंड रियलिटी)

भिलाई और दुर्ग में लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि कई निजी स्कूल “फिक्स सप्लाई सिस्टम” के जरिए किताबों और यूनिफॉर्म से अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं।
हर साल छोटे-छोटे बदलाव के नाम पर—
👉पुरानी किताबें बेकार कर दी जाती हैं
👉यूनिफॉर्म बदल दी जाती है
👉और अभिभावकों को मजबूरन नया खर्च उठाना पड़ता है
👉 अब यही पूरा मॉडल प्रशासन की जांच के दायरे में है।

13 अप्रैल—टर्निंग पॉइंट

सभी नोडल प्राचार्यों को साफ निर्देश है कि वे 13 अप्रैल तक पूरी रिपोर्ट जमा करें। इसके बाद जिन स्कूलों में गड़बड़ी सामने आएगी, उन पर सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।

✍️The CG ख़बर Analysis

यह सिर्फ एक जांच नहीं, बल्कि उस “एजुकेशन सिस्टम” पर सीधा प्रहार है, जहां पढ़ाई के नाम पर छिपा खर्च एक बड़ा मुद्दा बन चुका है।
अगर प्रशासन इस कार्रवाई को अंत तक ले जाता है, तो—
✅अभिभावकों को राहत मिलेगी
✅ स्कूलों की जवाबदेही तय होगी
✅ और सबसे अहम—शिक्षा को “व्यवसाय” बनने से रोकने की शुरुआत होगी

📢 आपकी आवाज, आपकी खबर

क्या आपके बच्चे के स्कूल में भी किताब, यूनिफॉर्म या फीस को लेकर दबाव बनाया जाता है?
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