11 | अप्रैल | 2026 | The CG ख़बर | कटनी | मध्यप्रदेश। शनिवार शाम जैसे ही Patna Pune Express प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर पहुंची, स्टेशन का माहौल अचानक अफरातफरी में बदल गया। कुछ ही मिनटों में आरपीएफ, जीआरपी के करीब 27 जवान, महिला एवं बाल विकास विभाग और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) की टीम एक कोच में दाखिल हुई और 167 नाबालिग बच्चों को ट्रेन से नीचे उतार लिया।
दृश्य बेहद चौंकाने वाला था—बच्चे डरे हुए, कुछ रोते हुए… और उनके साथ मौजूद लोग घबराए हुए। शुरुआती जानकारी में सामने आया कि ये सभी बच्चे बिहार के अररिया जिले के हैं, जिन्हें महाराष्ट्र के लातूर (उदगीर) के एक मदरसे में पढ़ाई के लिए ले जाया जा रहा था।
लेकिन कहानी यहीं से उलझने लगती है…
क्या-क्या मिला मौके पर? (Quick Facts Box)
◾कुल 167 नाबालिग बच्चे बरामद
◾सूचना सिर्फ 100 बच्चों की थी
◾सभी बच्चों के पास टिकट मौजूद
◾लेकिन माता-पिता की लिखित अनुमति नहीं
◾अलग-अलग समूहों में ले जाया जा रहा था
आरपीएफ को पहले एक संगठन से सूचना मिली थी कि ट्रेन में संदिग्ध रूप से बच्चों को ले जाया जा रहा है। जब टीम ने कार्रवाई की, तो संख्या उम्मीद से कहीं ज्यादा निकली। यही वह बिंदु था जहां मामला साधारण नहीं लगा।
बाल संरक्षण अधिकारी मनीष तिवारी ने बताया कि बच्चों के साथ कुछ वयस्क भी मौजूद थे, जो उन्हें मदरसे में पढ़ाई के लिए ले जाने की बात कर रहे हैं। लेकिन बिना अभिभावकीय सहमति के इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को ले जाना अपने आप में गंभीर सवाल खड़ा करता है।
➡️साथ आए व्यक्ति का दावा
बच्चों के साथ मौजूद सद्दाम नाम के व्यक्ति ने खुद को शिक्षक बताया और कहा—
◾“10 साल से बच्चों को पढ़ाने ले जा रहे हैं”
◾“हिंदी, उर्दू, अरबी, मैथ्स की पढ़ाई होती है”
◾“5 साल का कोर्स, कोई फीस नहीं”
◾“मदरसा चंदे से चलता है”
👉 लेकिन लिखित अनुमति का कोई ठोस सबूत नहीं मिला
बच्चों से पूछताछ में भी यही सामने आया कि वे पढ़ने जा रहे थे। लेकिन अधिकारियों के लिए सिर्फ बयान काफी नहीं होता—दस्तावेज ही असली आधार होते हैं, और यही यहां सबसे बड़ी कमी नजर आई।
कटनी रेलवे स्टेशन पहले भी ऐसे मामलों का गवाह रह चुका है, जहां बच्चों को चाइल्ड लेबर या अन्य संदिग्ध गतिविधियों के लिए ले जाया गया था। यही वजह रही कि इस बार प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की।
क्यों गहराया शक?
🔥पहले भी इसी रूट पर संदिग्ध केस सामने आए
🔥इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का मूवमेंट
🔥पैरेंट्स कंसेंट का अभाव
🔥अलग-अलग ग्रुप में ट्रांसफर
फिलहाल सभी बच्चों को सुरक्षा में लेकर आरपीएफ थाने लाया गया है, जहां उनकी काउंसलिंग की जा रही है। दस्तावेजों की जांच और अभिभावकों से संपर्क किया जा रहा है। कुछ बच्चों को कटनी बालगृह में रखा गया है, जबकि बाकी को जबलपुर शिफ्ट करने की तैयारी है। साथ आए वयस्कों से भी लगातार पूछताछ जारी है।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच चाइल्ड वेलफेयर कमेटी द्वारा की जाएगी और किसी भी एंगल को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
❗ सबसे बड़ा सवाल
क्या ये 167 मासूम सच में पढ़ाई के लिए जा रहे थे…
या फिर इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है?
✍️निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं, बल्कि एक ऐसा सवाल बन चुका है जो सिस्टम, सुरक्षा और बच्चों के भविष्य—तीनों पर एक साथ खड़ा है।
सच्चाई अभी सामने आनी बाकी है… लेकिन शक बहुत गहरा है।
👉 अब बताइए—क्या आपको ये मामला सीधा लगता है या कुछ गड़बड़ है?
