
जंगलों की आग रोकने के लिए बड़ा कदम, सुप्रीम कोर्ट ने दी अनुमति
उत्तराखंड में जंगलों को आग से बचाने के लिए 5 लाख पेड़ काटे जाएंगे। ये पेड़ फायर लाइन पर उग आए हैं, जो जंगलों में आग को फैलने से रोकने के लिए जरूरी हैं। यह कदम 1996 के बाद पहली बार उठाया जा रहा है।
क्या है फायर लाइन का महत्व?
| नियम | आवश्यकता |
|---|---|
| दो वन प्रभागों के बीच फायर लाइन | 100 फीट चौड़ी होनी चाहिए। |
| वन प्रभागों के भीतर रेंज फायर लाइन | 50 फीट चौड़ी होनी चाहिए। |
फायर लाइन का उद्देश्य जंगल की आग को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में फैलने से रोकना है। यह व्यवस्था ब्रिटिश काल से चली आ रही है और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आग रोकने का सबसे प्रभावी तरीका मानी जाती है।
पेड़ों की कटाई क्यों जरूरी?
- 1996 का सुप्रीम कोर्ट का आदेश:
- 1,000 मीटर से ऊपर ऊंचाई पर पेड़ काटने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
- इसके चलते फायर लाइन पर उगे पेड़ों को भी नहीं हटाया गया।
- आज ये पेड़ विशालकाय हो गए हैं, जिससे फायर लाइन जंगल में बदल चुकी है।
- 2023 में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय:
- 18 अप्रैल 2023 को कोर्ट ने पुराने आदेश को बदला।
- अब फायर लाइन की सफाई की अनुमति दी गई है।
फायर लाइन की सफाई का काम
| क्षेत्र | पेड़ों की संख्या |
|---|---|
| कुमाऊं मंडल | 1.5 लाख पेड़। |
| गढ़वाल मंडल | 3.5 लाख पेड़। |
| तराई पूर्वी प्रभाग | फायर लाइन की सफाई शुरू। |
प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) ने 28 अक्टूबर को सभी डीएफओ को फायर लाइन साफ करने के निर्देश दिए।
फायर सीजन और आग की चुनौती
फायर सीजन:
- वन विभाग के अनुसार, 15 फरवरी से 15 जून तक का समय फायर सीजन होता है।
- इस दौरान उत्तराखंड सहित देश के अन्य हिस्सों में जंगलों में आग लगने की घटनाएं आम हैं।
- जंगल की आग वनस्पति और वन्यजीवों को भारी नुकसान पहुंचाती है।
विशेषज्ञों की राय
- आईडी पांडे (पूर्व पीसीसीएफ): “फायर लाइन का सिस्टम ब्रिटिश काल से चला आ रहा है। इसे साफ रखना जंगल की आग रोकने के लिए जरूरी है।”
- डीएफओ हिमांशु बागड़ी (तराई पूर्वी प्रभाग): “फायर लाइन की सफाई का काम शुरू हो गया है। सीजन से पहले इसे पूरा कर लिया जाएगा।”
निष्कर्ष
उत्तराखंड में जंगलों की आग की समस्या से निपटने के लिए 5 लाख पेड़ों की कटाई एक बड़ा लेकिन जरूरी कदम है।
- फायर लाइन का प्रभावी इस्तेमाल जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
- वन विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि पेड़ों की कटाई से पर्यावरणीय संतुलन पर कम से कम असर पड़े।
“आग रोकने के लिए जरूरी कदम उठाना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संरक्षण भी उतना ही अहम है।”
