दुर्ग रेलवे स्टेशन के आसपास जाम: जनता को भारी असुविधा, समाधान की मांग तेज

दुर्ग रेलवे स्टेशन के आसपास जाम: जनता को भारी असुविधा, समाधान की मांग तेज

दुर्ग रेलवे स्टेशन के आसपास जाम: जनता को भारी असुविधा, समाधान की मांग तेज

दुर्ग:
दुर्ग रेलवे स्टेशन के आस-पास जाम की गंभीर समस्या से स्थानीय नागरिकों और यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे पर जनहित संघर्ष समिति के जिला संयोजक शारदा गुप्ता ने अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के कारण कई यात्रियों की ट्रेनें छूट रही हैं, और यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।

स्थानीय प्रशासन पर उठाए सवाल

शारदा गुप्ता ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, रेल मंत्री और सांसद को पत्र लिखकर इस समस्या के समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि 400 करोड़ रुपए की परियोजना के फंड पास होने के बावजूद काम में देरी हो रही है।

“यह समय है कि यातायात पुलिस और पार्किंग की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके,” उन्होंने कहा।

समस्याओं के समाधान के सुझाव

1. यातायात प्रबंधन में सुधार

  • यातायात पुलिस की तैनाती की जाए।
  • सड़क किनारे फुटपाथ और पैदल यात्री पथ को व्यवस्थित किया जाए।

2. सार्वजनिक परिवहन में सुधार

  • रेलवे स्टेशन से बस सेवाओं की शुरुआत की जाए।
  • ऑटो चालकों के लिए सुव्यवस्थित स्टैंड बनाया जाए।

3. पार्किंग व्यवस्था का सुधार

  • रेलवे स्टेशन के आसपास सुव्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था लागू की जाए।

4. फुटकर व्यापारियों का नियमन

  • सड़कों पर फुटकर व्यापारियों को निश्चित स्थानों पर व्यवस्थित किया जाए।

जनता की प्रमुख मांगें

शारदा गुप्ता के साथ इस अभियान में कई प्रमुख कार्यकर्ता जुड़े हुए हैं, जिनमें मदन सेन, पारस जंघेल, निशु पांडे, डॉ. रमेश श्रीवास्तव जैसे कई नाम शामिल हैं। इन सभी ने प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की है।

समाजसेवियों की अपील

जनहित संघर्ष समिति ने कहा है कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा। इस मुद्दे का समाधान केवल प्रशासन और नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

निष्कर्ष

दुर्ग रेलवे स्टेशन के आस-पास जाम की समस्या का समाधान करना बेहद जरूरी है। यह न केवल यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाएगा, बल्कि स्थानीय नागरिकों और यात्रियों को भी राहत प्रदान करेगा।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस दिशा में क्या कदम उठाता है।

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