जय यश कुकरेजा ने बांग्लादेश सरकार की आलोचना की, चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई की मांग

जय यश कुकरेजा ने बांग्लादेश सरकार की आलोचना की, चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई की मांग

जय यश कुकरेजा ने बांग्लादेश सरकार की आलोचना की, चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई की मांग

सनातनी हिंदू और भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के सदस्य जय यश कुकरेजा ने बांग्लादेश सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की गिरफ्तारी अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का उदाहरण है। उन्होंने इसे अन्यायपूर्ण करार दिया और चिन्मय कृष्ण दास व उनके साथियों की तत्काल रिहाई की मांग की।

भारत सरकार से कड़ा रुख अपनाने की अपील

जय यश कुकरेजा ने भारत सरकार से अपील की कि वह बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ कदम उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से वहां के हिंदुओं में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है और यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय होना चाहिए।


चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी से बढ़ा आक्रोश

बांग्लादेश में इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी ने हिंदू समुदाय को झकझोर कर रख दिया है।

  • उन पर आतंकवाद और राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
  • हिंदू समुदाय और इस्कॉन से जुड़े लोग इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बता रहे हैं।
  • इस गिरफ्तारी के खिलाफ बांग्लादेश और भारत दोनों में विरोध तेज हो गया है।

क्या है पूरा मामला?

  • 30 अक्टूबर 2024: चट्टगांव में हिंदू समुदाय की रैली के दौरान राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का आरोप लगा।
  • इस मामले में चट्टगांव पुलिस ने चिन्मय कृष्ण दास समेत 19 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

जय यश कुकरेजा का बयान

“बांग्लादेश सरकार को अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए। चिन्मय कृष्ण दास और उनके साथियों की गिरफ्तारी पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। उनकी तत्काल रिहाई होनी चाहिए। भारत सरकार को इस मामले पर ध्यान देना चाहिए।”


बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन

  • चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के खिलाफ बांग्लादेश में भी हिंदू समुदाय सड़कों पर उतर आया है।
  • जगह-जगह प्रदर्शन और नारेबाजी हो रही है।
  • प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह धार्मिक भेदभाव और न्याय का हनन है।

निष्कर्ष

चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी ने एक बार फिर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के मुद्दे को उजागर कर दिया है।
भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इन घटनाओं पर ध्यान देकर अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रयास करना चाहिए।


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