छत्तीसगढ़ में धान खरीदी संकट : 31 लाख टन धान केंद्रों में जाम || धान का समाधान कब ? ||

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी संकट : 31 लाख टन धान केंद्रों में जाम || धान का समाधान कब ? ||

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी संकट : 31 लाख टन धान केंद्रों में जाम || धान का समाधान कब ? ||

धान खरीदी के मामले में छत्तीसगढ़ सरकार ने इस वर्ष रिकॉर्ड शुरुआत की है, लेकिन मिलर्स और परिवहन व्यवस्था में समस्याओं के कारण खरीदी केंद्रों में धान जाम की समस्या बढ़ती जा रही है। 14 नवंबर से शुरू हुई धान खरीदी के बाद अब तक 32 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है, लेकिन केवल 1.29 लाख मीट्रिक टन धान का परिवहन हुआ है। इस वजह से 31 लाख टन धान खरीदी केंद्रों में पड़ा है, और 60% केंद्रों में बफर स्टॉक की समस्या हो चुकी है।


धान खरीदी की प्रमुख स्थिति:

क्रमांकप्रमुख बिंदुआंकड़े
1.खरीदी की शुरुआत (14 नवंबर)रोजाना 1-1.5 लाख मीट्रिक टन
2.कुल खरीदा गया धान32.68 लाख मीट्रिक टन
3.उठाव किया गया धान1.29 लाख मीट्रिक टन
4.डंप हुआ धान31.38 लाख मीट्रिक टन
5.प्रभावित केंद्र1687/2739 केंद्र

धान खरीदी केंद्रों की स्थिति

1. बफर स्टॉक का संकट:

  • महासमुंद: 139 में से 138 केंद्रों में स्टॉक जाम।
  • बालोद: 142 में से 135 केंद्रों में स्टॉक जाम।
  • बेमेतरा: 166 में से 129 केंद्रों में बफर स्टॉक।
  • कवर्धा: 108 में से 100 केंद्र स्टॉक से भरे।

2. फड़ और स्कूलों में धान:

  • धमतरी और बागतराई केंद्रों में क्षमता से दोगुना धान जमा है।
  • खेल मैदान और स्कूलों में धान रखने की व्यवस्था, जो जल्द भर जाएगी।

धान परिवहन की बाधाएं

जिलाकुल धान (क्विंटल)परिवहन किया गयाडंप धान
राजनांदगांव32,99,9081,00,00022,66,907
खैरागढ़13,01,8111,02,27011,99,541
मोहला-मानपुर6,30,58315,1806,15,403

मुख्य कारण:

  1. परिवहन अनुबंध आदेश में देरी: जिलों में पंजीयन और अनुबंध की प्रक्रिया लंबित।
  2. मिलर्स की हड़ताल: कस्टम मिलिंग नीति और बकाया राशि को लेकर मिलर्स नाराज।
  3. भूसा संकट: स्टॉक सुरक्षित रखने के लिए भूसा की कमी।

सरकार और मिलर्स के बीच समझौता

मुख्यमंत्री की मध्यस्थता के बाद राइस मिलर्स एसोसिएशन ने 9 दिसंबर से उठाव शुरू करने का आश्वासन दिया है। रायपुर और बिलासपुर जिलों में उठाव आदेश जारी हुए हैं, लेकिन अन्य जिलों में स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

जिलाउठाव प्रतिशत
धमतरी17%
बालोद7%
बेमेतरा5%

समस्याओं का समाधान:

  1. परिवहन में तेजी: सभी जिलों में मिलर्स का पंजीयन और अनुबंध जल्द कराना।
  2. भूसा उपलब्धता: खरीदी केंद्रों पर स्टेकिंग के लिए वैकल्पिक इंतजाम।
  3. मौसम की चुनौती: खराब मौसम में धान की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

कई जिलों में खरीदी बंद की चेतावनी

दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिलों के 91% केंद्रों में जगह खत्म हो चुकी है। सहकारी बैंकों ने सरकार को खरीदी बंद करने की चेतावनी दी है। वहीं, कांग्रेस के प्रदर्शन और किसानों की समस्याएं इस संकट को और गहरा रही हैं।


निष्कर्ष:

धान खरीदी और परिवहन में हो रही देरी छत्तीसगढ़ सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। किसानों की उपज और केंद्रों में भरा स्टॉक जल्द हल न किया गया तो खरीदी प्रक्रिया पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं।
आने वाले दिनों में उठाव प्रक्रिया में तेजी और मिलर्स के अनुबंध की स्थिति इस समस्या का समाधान तय करेंगे।

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