
The CG ख़बर |अगर आप चाय बनाने के लिए टी बैग का उपयोग कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हाल ही में किए गए एक शोध में सामने आया है कि टी बैग का प्रयोग न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि आपके स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक हो सकता है। इसमें पाए जाने वाले लाखों माइक्रोप्लास्टिक आपके शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं।
क्या कहता है शोध?
स्पेन के बार्सिलोना के स्वायत्त विश्वविद्यालय में किए गए इस शोध के अनुसार, टी बैग में पॉलिएस्टर और अन्य प्लास्टिक आधारित पदार्थों का उपयोग किया जाता है। ये सामग्री गर्म पानी में घुलने पर बड़ी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक्स और नैनोप्लास्टिक्स उत्सर्जित करती हैं।
- माइक्रोप्लास्टिक्स: प्लास्टिक के सूक्ष्म कण जो आंखों से दिखाई नहीं देते।
- नैनोप्लास्टिक्स: और भी छोटे कण जो कोशिकाओं में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं।
कैसे होता है नुकसान?
शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह प्लास्टिक कण हमारी आंतों की कोशिकाओं में प्रवेश कर सकते हैं। वहां से ये रक्त प्रवाह में शामिल होकर पूरे शरीर में फैल जाते हैं।
प्रमुख हानियां:
- पाचन तंत्र पर प्रभाव: प्लास्टिक कण आंतों में सूजन और अन्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
- रक्त संचार प्रणाली पर असर: प्लास्टिक के ये कण रक्त प्रवाह में मिलकर हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
- दीर्घकालिक प्रभाव: शरीर में जमा होने वाले ये कण लंबे समय तक गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
टी बैग में पाए गए रसायन
शोधकर्ताओं ने बाजार में उपलब्ध विभिन्न प्रकार के टी बैग्स की जांच की। इनमें निम्नलिखित पदार्थ पाए गए:
- नायलॉन-6
- पॉलीप्रोपाइलीन
- सेल्यूलोज
नायलॉन-6 और पॉलीप्रोपाइलीन जैसे प्लास्टिक कण चाय में मिलकर इसे प्रदूषित कर सकते हैं।
क्या करें? सावधानियां अपनाएं!
अगर आप चाय पीने के शौकीन हैं और रोजाना टी बैग का उपयोग करते हैं, तो निम्नलिखित उपाय अपनाना फायदेमंद रहेगा:
- ढीली पत्ती वाली चाय का उपयोग करें।
- कांच या स्टील के चाय छन्नी का उपयोग करें।
- टी बैग्स का उपयोग कम करें, खासकर पॉलिएस्टर या प्लास्टिक कोटेड बैग्स।
निष्कर्ष
शोध के ये नतीजे बेहद चिंताजनक हैं। हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली टी बैग्स न केवल पर्यावरण के लिए खतरा हैं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदेह हैं। समय आ गया है कि हम अपनी आदतों में बदलाव करें और प्राकृतिक विकल्पों की ओर कदम बढ़ाएं।
आपकी चाय, आपका स्वास्थ्य! क्या आप बदलाव के लिए तैयार हैं?
स्रोत: बार्सिलोना के स्वायत्त विश्वविद्यालय का शोध
