
धान खरीदी का सीजन जो नवंबर से शुरू हुआ था, अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर रहा है। जिले में 34491 किसान ऐसे हैं जिन्होंने एक बार भी धान नहीं बेचा। जाम की स्थिति और धीमी प्रक्रिया के कारण अब इन किसानों को जनवरी के अंत तक धान बेचने की चिंता सताने लगी है। कई किसानों ने अब तक टोकन तक प्राप्त नहीं किया है, जिससे उनकी नाराजगी बढ़ रही है।
धान खरीदी में धीमी प्रक्रिया
धान खरीदी का यह अभियान 31 जनवरी तक जारी रहेगा। जिले में 114770 पंजीकृत किसानों में से अब तक केवल 80279 किसानों ने ही 38 लाख क्विंटल धान बेचा है। जबकि जिले का टारगेट 64 लाख क्विंटल है, लेकिन वास्तविक खरीदी अभी लक्ष्य से 26 लाख क्विंटल पीछे है।
जनवरी के शेष दिनों में शनिवार, रविवार और सरकारी छुट्टियों को मिलाकर किसानों के पास धान बेचने के लिए बेहद सीमित दिन बचे हैं। हालाँकि, उठाव में तेजी के कारण बफर लिमिट वाले केन्द्रों की संख्या 95 से घटकर 23 हो गई है, फिर भी प्रक्रिया धीमी बनी हुई है।
ऑनलाइन और ऑफलाइन टोकन की समस्या
किसानों को टोकन जारी करने में आ रही समस्याओं ने स्थिति और भी जटिल बना दी है। कई किसान ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से टोकन प्राप्त करने में असमर्थ रहे हैं। इससे उनकी धान बेचने की प्रक्रिया लगातार अटकी हुई है।
धान का धीमा उठाव
जिले में मिलरों द्वारा धान उठाने की गति बेहद धीमी रही। अब तक खरीदे गए 38 लाख क्विंटल धान में से केवल 16 लाख क्विंटल का ही उठाव हो सका है। हालांकि, हाल ही में मिलरों की हड़ताल समाप्त होने के बाद स्थिति में थोड़ी राहत आई है। कलेक्टर त्रिचा प्रकाश चौधरी ने निर्देश दिए हैं कि उठाव में तेजी लाई जाए, ताकि आगे की प्रक्रिया सुगम हो सके।
धान खरीदी का गणित: जनवरी का टारगेट कठिन
जिले के 122859 हेक्टेयर कृषि रकबे में से केवल 72401 हेक्टेयर में धान खरीदी हुई है, जो कुल पंजीकृत क्षेत्र का लगभग 65-70% है। जनवरी में बचे हुए दिनों में 26 लाख क्विंटल धान खरीदने की आवश्यकता होगी, तभी लक्ष्य पूरा हो सकेगा। लेकिन खरीदी की धीमी गति को देखते हुए यह चुनौतीपूर्ण लग रहा है।
किसानों की नाराजगी और मांग
जाम की समस्या और टोकन वितरण की कमी से किसान परेशान हैं।
- सुझाव और मांग:
- टोकन वितरण प्रक्रिया को तेज किया जाए।
- खरीदी केन्द्रों पर जाम की स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त प्रबंध किए जाएं।
- किसानों को अतिरिक्त समय या विकल्प प्रदान किया जाए।
धान खरीदी में देरी का प्रभाव
यदि किसान अपनी उपज समय पर नहीं बेच पाते, तो उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। धान की खरीदी में देरी से न केवल किसान बल्कि सरकारी लक्ष्यों पर भी प्रभाव पड़ेगा।
निष्कर्ष
धान खरीदी अभियान में धीमी प्रक्रिया और व्यवस्थागत समस्याओं ने किसानों को संकट में डाल दिया है। 31 जनवरी तक का समय अब बेहद महत्वपूर्ण है। प्रशासन को चाहिए कि वह किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान करे ताकि खरीदी लक्ष्य पूरा हो सके और किसान राहत की सांस ले सकें।
