![श्री हरिहर मन्दिर [ संभल की शाही जामा मस्जिद ] क्या कहते है तथ्य मन्दिर है या मस्जिद…. श्री हरिहर मन्दिर [ संभल की शाही जामा मस्जिद ] क्या कहते है तथ्य मन्दिर है या मस्जिद….](https://i0.wp.com/thecgkhabar.in/wp-content/uploads/2024/11/kmc_20241124_174932.png?ssl=1)
उत्तर प्रदेश के संभल में स्थित शाही जामा मस्जिद, जिसे बाबरी मस्जिद भी कहा जाता है, एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद हरिहर मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। इस विवाद को लेकर मामला कोर्ट में लंबित है और हाल ही में कोर्ट ने मस्जिद का सर्वेक्षण करने का आदेश दिया। इस संदर्भ में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 150 साल पुरानी रिपोर्ट और ऐतिहासिक दस्तावेज़ों ने इस बहस को और भी दिलचस्प बना दिया है।
ASI की 1879 की रिपोर्ट में क्या है?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की 1879 की एक विशेष रिपोर्ट, जिसे तत्कालीन अधिकारी एसीएल कार्ले ने तैयार किया था, इस विवाद के केंद्र में है। इस रिपोर्ट का शीर्षक “Tours in the Central Doab and Gorakhpur 1874–1875 and 1875–1876” है। रिपोर्ट में संभल की शाही जामा मस्जिद का उल्लेख करते हुए दावा किया गया कि मस्जिद के अंदर और बाहर के खंभे एक प्राचीन हिंदू मंदिर के हैं।
- मस्जिद के खंभे: रिपोर्ट में बताया गया कि मस्जिद के खंभे प्लास्टर से ढंके गए हैं, लेकिन सर्वे के दौरान एक खंभे पर प्लास्टर उखड़ने पर लाल रंग का प्राचीन खंभा सामने आया। यह खंभा हिंदू मंदिरों की विशिष्ट शैली का था।
- गुंबद का जीर्णोद्धार: रिपोर्ट में जिक्र है कि मस्जिद के गुंबद का पुनर्निर्माण हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान द्वारा करवाया गया था।
- शिलालेख: मस्जिद में मौजूद एक शिलालेख के अनुसार, इसे 933 हिजरी में मीर हिंदू बेग द्वारा मंदिर से मस्जिद में परिवर्तित किया गया। मीर हिंदू बेग बाबर के दरबार का एक प्रमुख व्यक्ति था।
रिपोर्ट के खुलासे:
बाबरनामा और इतिहासकारों के दावे
हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता हरिशंकर जैन ने कोर्ट में प्रस्तुत याचिका में बाबरनामा का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, बाबरनामा के अंग्रेजी अनुवाद में स्पष्ट उल्लेख है कि भगवान विष्णु के एक मंदिर को मीर बेग ने मस्जिद में परिवर्तित किया।
इतिहासकार और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के निदेशक डॉ. ओमजी उपाध्याय ने इस दावे का समर्थन करते हुए कहा कि बाबरनामा और तारीख-ए-बाबरी जैसे ग्रंथों में ऐसे कई प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा मंदिरों को मस्जिदों में बदलने के ऐतिहासिक उदाहरण भारत में भरे पड़े हैं।
मुस्लिम पक्ष का तर्क
दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष इन दावों को सिरे से खारिज करता है। संभल की जामा मस्जिद के अध्यक्ष मोहम्मद जफर ने कहा कि मस्जिद किसी मंदिर को तोड़कर नहीं बनाई गई। उन्होंने कोर्ट द्वारा सर्वे के आदेश को लेकर सवाल उठाए और इसे “असामान्य प्रक्रिया” करार दिया। जफर के अनुसार, मस्जिद में मंदिर के किसी भी अवशेष का कोई निशान नहीं है।
कोर्ट कमिश्नर सर्वे का पहला चरण पूरा
मंगलवार को मस्जिद का कोर्ट कमिश्नर सर्वे शुरू हुआ। सर्वे टीम ने मस्जिद के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया। आने वाले दिनों में सर्वे टीम फिर से मस्जिद का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगी।
क्या कहता है इतिहास?
संभल की जामा मस्जिद का विवाद अयोध्या, मथुरा, काशी जैसे विवादों की श्रृंखला में एक नया अध्याय जोड़ता है। हिंदू पक्ष का दावा है कि भविष्य में और भी कई मस्जिदों को लेकर इसी तरह के मामले सामने आ सकते हैं।
यह मामला इतिहास, धर्म और न्यायपालिका के बीच एक बड़ा मुद्दा बन गया है। इस पर अंतिम फैसला कोर्ट से आने की उम्मीद है, जो इस ऐतिहासिक स्थल के असली स्वरूप पर रोशनी डालेगा।
