
पाटन, छत्तीसगढ़:
राज्य शासन के बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत पाटन ब्लॉक में सुगंधित चावल की खेती को नया आयाम मिल रहा है। लगभग 250 एकड़ भूमि पर किसान अब जवांफूल, विष्णुभोग, तरुण भोग, दुबराज और इंदिरा बरानी जैसे सुगंधित चावल की फसल तैयार कर रहे हैं। इन चावलों की महक और गुणवत्ता के कारण उनकी बाजार में अधिक मांग है।
बीज निगम के अनुबंध से किसानों को लाभ
कृषि विभाग की जानकारी के अनुसार, सोनपुर, पंदर, सांकरा, और चंगोरी गांवों में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन गांवों के किसानों ने बीज निगम के साथ तीन साल का अनुबंध किया है, जिसमें उन्हें हर प्रकार की सहायता दी जा रही है।
- सब्सिडी योजनाएं:
बीज निगम किसानों को प्रति एकड़ ₹10,000 की सब्सिडी दे रहा है। यह सब्सिडी बीज, वर्मी कम्पोस्ट, जैविक खाद, बायोफर्टिलाइजर, निंदाई, और कीट प्रबंधन जैसे विभिन्न चरणों में दी जाती है। - फसल की खरीदी:
किसान अपनी फसल निगम को ₹3,800 प्रति क्विंटल में बेच सकते हैं, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ₹500 अधिक है।
जैविक खेती की ओर किसानों का बढ़ता रुझान
सरकार का उद्देश्य तीन वर्षों में पाटन के किसानों को जैविक खेती के लिए तैयार करना है। जैविक खेती न केवल उत्पादकता बढ़ा रही है बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। इसमें गोबर खाद, गुड़, और गौमूत्र से तैयार जैविक खाद का उपयोग किया जा रहा है।
पहले से बेहतर परिणाम:
दुर्ग जिले के अन्य गांवों जैसे तेलगुंडा, जरवाय, और आमलोदी में पहले भी जैविक खेती की गई थी। किसानों के अनुभव के अनुसार, सुगंधित चावल की खेती में लागत कम आती है और बाजार में इसकी मांग अधिक रहती है।
सुगंधित चावल की बढ़ती मांग
सुगंधित चावल की कीमतें बाजार में ₹150 से ₹200 प्रति किलो तक पहुंचती हैं। किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा बेहतर दरों पर खरीदी और जैविक खेती की सहायता ने उन्हें पारंपरिक खेती के बजाय सुगंधित चावल की ओर प्रेरित किया है।
भारत सरकार के पोर्टल से जुड़ा कार्यक्रम:
राज्य शासन ने इस कार्यक्रम को भारत सरकार के पोर्टल से जोड़ दिया है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और दाम मिल सके।
कृषि क्षेत्र में नई उम्मीदें
छत्तीसगढ़ के पाटन ब्लॉक के किसानों का यह कदम क्षेत्र के कृषि विकास के लिए एक मिसाल है। जैविक और सुगंधित चावल की खेती से किसान अधिक मुनाफा कमा सकते हैं, साथ ही यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
निष्कर्ष:
सुगंधित चावल की खेती किसानों के लिए एक लाभकारी अवसर बन रही है। पाटन और इसके आसपास के गांव इस बदलाव का नेतृत्व कर रहे हैं, जो छत्तीसगढ़ की कृषि को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
