
Durg के तकियापारा स्कूल* में हुई आर्थिक अनियमितता ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।** स्कूल के पूर्व प्राचार्य नौशाद खान पर आरोप है कि उन्होंने पीएफएमएस (PFMS) के जरिए स्कूल के फंड का फर्जी तरीके से लाखों रुपये निकाल लिया। मामले की शिकायत और जांच के बावजूद दोषी पाए जाने पर भी किसी ठोस कार्यवाही का अभाव सामने आया है।
क्या है पूरा मामला?
🔵 तकियापारा हाई स्कूल के प्राचार्य रहे नौशाद खान को 20 अक्टूबर 2022 को फरिदनगर हाई स्कूल में स्थानांतरित कर दिया गया था। इसके बावजूद, उनके हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर 24 मार्च 2024 तक फंड निकाले जाते रहे।
- पीएफएमएस फंड का उपयोग:
यह फंड स्कूल के संचालन और विकास के लिए होता है। लेकिन प्राचार्य खान ने इसका दुरुपयोग कर लाखों रुपये की अनियमितता की। - शिकायत:
राज्य पेंशनर एवं कर्मचारी कल्याण संघ के प्रांतीय कोषाध्यक्ष रूद्र नारायण सिन्हा ने इस मामले को उठाया और इसकी शिकायत तत्कालीन डीईओ अभय जायसवाल और वर्तमान डीईओ अरविंद मिश्रा से की।
जांच में क्या निकला?
🟠 दो बार जांच कराई गई, लेकिन मामला दबाया गया:
- डीईओ अभय जायसवाल ने जांच कराई, जिसमें नौशाद खान दोषी पाए गए।
- इसके बाद आए डीईओ अरविंद मिश्रा ने भी मामले की जांच कराई, और फिर से खान को दोषी पाया गया।
फिर भी कार्यवाही क्यों नहीं हुई?
- दोनों डीईओ द्वारा कार्यवाही न करने से इस मामले को दबाने की कोशिश की गई।
- विभागीय लापरवाही के चलते इस घोटाले को लेकर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
आर्थिक अनियमितता से उठे सवाल
- लाखों की राशि का दुरुपयोग:
केंद्रीय फंड के रूप में मिलने वाली इस राशि का दुरुपयोग सीधे तौर पर शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। - विभागीय भूमिका:
दोनों डीईओ द्वारा मामले को नजरअंदाज करना आरोपियों के साथ मिलीभगत को दर्शाता है !
क्या हैं अगले कदम?
🟢 शिकायतकर्ता रूद्र नारायण सिन्हा ने अब मामले को संयुक्त संचालक दुर्ग के पास पहुंचाया है।
- उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
- आशा है कि इस बार न्याय होगा।
निष्कर्ष
दुर्ग तकियापारा स्कूल में हुए इस घोटाले ने एक बार फिर सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जरूरत है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और शिक्षा विभाग में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
⚠️ क्या इस तरह के घोटालों को उजागर करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी नहीं है? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं।
