
स्वास्थ्य विभाग ने गैरजरूरी केमिकल की भारी खरीदी
10 करोड़ का केमिकल बर्बाद, 12 करोड़ की बर्बादी और लाइन में! स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने न सिर्फ करोड़ों का नुकसान किया, बल्कि मरीज जरूरी जांचों से वंचित हैं। क्यों खरीदा गया गैरजरूरी स्टॉक? जानें इस बड़ी गड़बड़ी की पूरी कहानी, जो सरकारी लापरवाही का नया चेहरा उजागर करती है।
गैरजरूरी खरीदी की वजह से 10 करोड़ रुपए का रीएजेंट खराब हो गया, और दिसंबर में 12 करोड़ का और एक्सपायर होने की कगार पर है। जबकि 70 से अधिक पैथोलॉजी लैब्स रीएजेंट की कमी के कारण कई महत्वपूर्ण जांचें नहीं कर पा रही हैं।
यह स्थिति छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (CGMSC) की लापरवाही को उजागर करती है, जो न केवल गलत आपूर्ति की बल्कि स्टॉक प्रबंधन में भी असफल रही।
रसायन विज्ञान प्रयोगशाला में प्रयुक्त सामान्य रसायन हाइड्रोजन पेरोक्साइड से लेकर सल्फ्यूरिक एसिड तक , रसायन विज्ञान प्रयोगशाला में विभिन्न प्रकार के रसायनों का उपयोग किया जाता है। उनके पास अनुप्रयोगों की एक विस्तृत श्रृंखला है और आम तौर पर नए पदार्थों के परीक्षण और संश्लेषण के लिए उपयोग किया जाता है।
एजेंट खरीदी का असमंजस
स्वास्थ्य विभाग ने 450 करोड़ रुपए के रीएजेंट खरीदे, जिनमें से कई बेहद कम उपयोग में आते हैं। ये केमिकल मेडिकल ट्रांसप्लांट जैसे हार्ट, लीवर, ब्रेन या किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान खून की जांच में ही उपयोगी होते हैं।
गड़बड़ियां:
- रीएजेंट की आपूर्ति वहां की गई, जहां लैब तकनीशियन तक नहीं हैं।
- हेल्थ सेंटरों में फ्रिजर में रखे पैकेट सालों से बेकार पड़े हैं।
- बिना जांच और प्लानिंग के सामान सप्लाई किया गया।
ग्राउंड रिपोर्ट: स्टॉक डंप
राजधानी और आउटर इलाकों के हेल्थ सेंटरों जैसे खमतराई, भनपुरी, बिरगांव, मंदिरहसौद, मानिकचौरी, खरोरा और आरंग में बड़ी मात्रा में स्टॉक पड़ा है। अस्पतालों में लैब न होने के बावजूद, केमिकल भेजा गया।
कैसे हुई ये गड़बड़ी?
- रीएजेंट खरीद का ऑर्डर एक ही कंपनी को दिया गया।
- कंपनी ने तय शेड्यूल के बजाय एक ही खेप में पूरा स्टॉक सप्लाई कर दिया।
- CGMSC के गोदाम में जगह न होने के कारण इसे आनन-फानन में हेल्थ सेंटरों को भेज दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बड़ी लापरवाही
पद्मनी भोई (CGMSC की एमडी) का बयान:
“जब डंप स्टॉक की जानकारी मिली, हमने चिट्ठी भेजकर स्टॉक वापस मंगवाया। लेकिन मांग न होने के कारण रीएजेंट एक्सपायर हो रहे हैं।”
विभाग ने स्टॉक वापस तो मंगवाया, लेकिन प्रबंधन की खामियां जारी रहीं।
इस लापरवाही का क्या मतलब है?
- करोड़ों रुपए का नुकसान: 450 करोड़ का सामान खरीदने के बाद लाखों मरीज इस सुविधा से वंचित हैं।
- स्वास्थ्य सेवाओं पर असर: रीएजेंट की कमी से 100 से अधिक जांचें रुकी हुई हैं।
- विभाग की छवि पर असर: ऐसे मामलों से जनता का भरोसा टूटता है।
सुधार के लिए सुझाव
- प्लानिंग और ऑडिट: भविष्य में खरीदी से पहले जरूरतों का आकलन किया जाए।
- ट्रैकिंग सिस्टम: खरीदी और वितरण का रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम लागू हो।
- अकाउंटेबिलिटी फिक्स करना: संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
- पैथोलॉजी लैब्स में सुधार: सभी हेल्थ सेंटर्स में लैब्स और तकनीशियन की उपलब्धता सुनिश्चित हो।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही ने एक बार फिर सरकारी सिस्टम की खामियों को उजागर किया है। जनता की मेहनत की कमाई का सही उपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी घटनाएं बार-बार दोहराई जाएंगी।
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