
जिले के 15+ केंद्रों में ओवरस्टॉक, तौल के लिए नहीं बची जगह
जिले में धान खरीदी संकट गहराता जा रहा है। स्थिति यह है कि 15 से अधिक धान खरीदी केंद्रों में ओवर स्टॉक हो चुका है। कई जगहों पर धान तौलने की जगह तक नहीं बची है। वहीं, धान उठाव नहीं होने से छह केंद्रों में खरीदी पहले ही बंद हो चुकी है।
मिलर्स की हड़ताल और बकाया भुगतान के कारण केंद्रों में धान की खरीदी ठप होने की स्थिति बन गई है। मिलर्स ने साफ कर दिया है कि वे 20 दिसंबर तक किसी भी सूरत में धान का उठाव नहीं करेंगे।
धान खरीदी केंद्रों की स्थिति
सभी 102 खरीदी केंद्रों में धान की स्थिति गंभीर हो चुकी है। 15 केंद्रों में धान की मात्रा बफर लिमिट से 5 से 6 गुना अधिक हो गई है।
| केंद्र का नाम | स्थिति | भंडारण क्षमता (क्विंटल) | मौजूद धान (क्विंटल) |
|---|---|---|---|
| नगपुरा | खरीदी बंद | 50,000 | 3,00,000 |
| भेड़सर | खरीदी बंद | 40,000 | 2,50,000 |
| धमधा | खरीदी बंद | 30,000 | 2,00,000 |
धान की इस भंडारण समस्या का कारण बकाया भुगतान को बताया जा रहा है।
क्यों रुका धान उठाव?
धान उठाव के लिए सरकार और मिलर्स के बीच गतिरोध चल रहा है। मिलर्स का कहना है कि 2022-23 के सीजन का आधा भुगतान और 2023-24 का पूरा भुगतान अभी तक लंबित है।
मिलर्स द्वारा उठाए गए कदम:
- मिलर्स ने 93 पंजीकरण के जरिए 40 लाख क्विंटल धान का एग्रीमेंट किया।
- केवल 5 हजार क्विंटल का उठाव हो सका है।
- सरकार के फैसले से असंतोष: बुधवार को सरकार ने केवल दर बढ़ाने का फैसला किया, जिससे मिलर्स नाराज हैं।
धान खरीदी केंद्रों में धान का आंकड़ा
गुरुवार को खरीदी के बाद 19.16 लाख क्विंटल धान खरीदा जा चुका है। लेकिन, यह अपर्याप्त सुरक्षा में खुले आसमान के नीचे रखा गया है।
स्थिति खराब होती जा रही है
कई केंद्रों पर स्थिति चिंताजनक हो गई है।
| केंद्र का नाम | धान भंडारण स्थिति | स्थिति |
|---|---|---|
| डोड़की | भंडारण क्षमता खत्म | खरीदी बंद |
| सांतरा | ओवरस्टॉक | जोखिमपूर्ण |
| कन्हारपुरी | धान तौल नहीं हो रही | खरीदी बंद |
किसान संगठनों का आक्रोश
छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन ने इस संकट पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि सरकार और मिलर्स के विवाद का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
- संगठन की चेतावनी:
यदि रविवार तक व्यवस्था ठीक नहीं हुई, तो सोमवार को किसान सड़क पर उतरेंगे। - किसान कलेक्ट्रेट परिसर में धान छोड़ने का ऐलान कर चुके हैं।
राइस मिलर्स की हड़ताल
राइस मिलर्स एसोसिएशन ने रायपुर में बैठक के बाद 20 दिसंबर तक हड़ताल का ऐलान किया है।
| बैठक के निर्णय | प्रभाव |
|---|---|
| बिना भुगतान मिलिंग नहीं होगी | धान उठाव बंद रहेगा |
| काले कपड़े पहनकर विरोध प्रदर्शन | सरकार पर दबाव डालने की कोशिश |
सोसायटी ऑपरेटरों का भी प्रदर्शन
धान खरीदी व्यवस्था में सोसायटी ऑपरेटरों का योगदान महत्वपूर्ण होता है। लेकिन गुरुवार से ऑपरेटर भी हड़ताल पर चले गए हैं।
उनकी प्रमुख मांगें हैं:
- भुगतान समय पर किया जाए।
- कार्य की स्पष्ट नीति बनाई जाए।
प्रशासन और किसान के बीच खिंचाव
- पंजीकरण किसान: जिले में 1,14,781 किसान पंजीकृत हैं।
- धान बेच चुके किसान: अब तक केवल 45,000 किसानों ने ही धान बेचा है।
किसान समस्या:
टोकन मिलने के बाद भी धान नहीं तौल पा रहे। आनलाइन टोकन दर्ज होने के बावजूद किसानों को नई तिथि का इंतजार करना पड़ रहा है।
समाधान की राह
| समस्या | संभावित समाधान |
|---|---|
| धान उठाव | ट्रांसपोर्टरों और मिलर्स के साथ सहमति बने। |
| ओवर स्टॉक केंद्र | अस्थाई भंडारण केंद्र खोले जाएं। |
| किसानों का असंतोष | समय पर टोकन मान्यता और भुगतान सुनिश्चित हो। |
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य महासंघ ने स्थिति संभालने की कोशिशें तेज कर दी हैं। लेकिन बातचीत के नतीजे अभी स्पष्ट नहीं हैं।
रामनिवास अग्रवाल, जिला एसोसिएशन संरक्षक, ने बताया,
“राज्य सरकार को जल्द समाधान निकालना होगा, वरना स्थिति और बिगड़ सकती है।”
किसान आंदोलन की तैयारी
सोमवार को नगपुरा, भेड़सर, दमोदा जैसे केंद्रों से किसान ट्रैक्टरों में धान भरकर कलेक्ट्रेट आने की योजना बना रहे हैं।
किसान नेता धर्मेश देशमुख ने कहा,
“अगर प्रशासन पहल नहीं करेगा, तो किसान उपज वहीं छोड़ देंगे।”
पॉइंट वाइज एनालिसिस
1. किसानों पर प्रभाव
लंबे समय से धान न बेच पाने के कारण आर्थिक नुकसान।
कलेक्ट्रेट तक आंदोलन किसानों की नाराजगी का संकेत।
2. प्रशासन की नाकामी
समय पर उठाव की व्यवस्था न करना।
संग्रहण केंद्र खोलने में देरी।
3. मिलर्स और सरकार के बीच गतिरोध
पुराना भुगतान बकाया होने से सरकार की साख पर सवाल।
मिलर्स का विरोध और उठाव न करने का निर्णय समस्या को बढ़ा रहा।
4. समाधान के उपाय
सरकार को जल्द भुगतान निपटाने पर निर्णय लेना होगा।
धान उठाव के लिए ट्रांसपोर्ट अनुबंध शीघ्र करना।
निष्कर्ष
धान खरीदी संकट का समाधान निकालने के लिए प्रशासन, मिलर्स और किसान संगठनों के बीच तत्काल संवाद की आवश्यकता है। समस्या का समाधान न होने पर किसान आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है।
