गुरु घासीदास जी की 268वीं जयंती पर भव्य समारोह: सत्य, समानता और शांति के आदर्शों का महोत्सव

गुरु घासीदास जी की 268वीं जयंती पर भव्य समारोह: सत्य, समानता और शांति के आदर्शों का महोत्सव

गुरु घासीदास जी की 268वीं जयंती पर भव्य समारोह: सत्य, समानता और शांति के आदर्शों का महोत्सव

The CG ख़बर भिलाई। छत्तीसगढ़ के महान संत, सतनाम बौद्धिक क्रांति के अग्रदूत, और समानता, अहिंसा, प्रेम, करुणा, भाईचारे के प्रतीक बाबा गुरु घासीदास जी की 268वीं जयंती 18 दिसंबर की पूर्व संध्या पर भव्य रूप से मनाई गई। इस आयोजन का आयोजन भिलाई इस्पात संयंत्र एससी-एसटी एम्पलाइज एसोसिएशन (पंजीयन क्रमांक 6976) के बैनर तले हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ एसोसिएशन के अध्यक्ष माननीय कोमल प्रसाद जी ने बाबा गुरु घासीदास जी के तैलचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया। यह आयोजन समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणा और एकता का प्रतीक बना।

गुरु घासीदास जी: छत्तीसगढ़ के गौरव और बौद्धिक क्रांति के अग्रदूत

गुरु घासीदास जी ने अपने जीवनकाल में समाज में व्याप्त कुरीतियों और अंधविश्वासों को चुनौती दी। मुख्य अतिथि कोमल प्रसाद जी ने अपने उद्बोधन में गुरु घासीदास जी के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा, “गुरु घासीदास जी ने ‘मनखे-मनखे एक समान’ का सिद्धांत देकर समाज को समानता का मंत्र दिया। उनका यह सामाजिक आंदोलन आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने सतनाम के माध्यम से सत्य, अहिंसा, और शांति का संदेश दिया, जिसने छत्तीसगढ़ की संस्कृति और समाज को नई दिशा दी।”

समाज सुधार और मानवीयता के प्रतीक

कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ समाजसेवी और सतनाम धाम उमर पोटी के अध्यक्ष श्री सुखचंद देश लहरे ने गुरु घासीदास जी की महानता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “गुरु घासीदास जी न केवल समाज सुधारक थे, बल्कि कुशल वैद्य, योग विद्या के ज्ञाता और एक दूरदर्शी संत भी थे। उन्होंने संपूर्ण मानव समाज के लिए सत्य, प्रेम और करुणा के सिद्धांत प्रस्तुत किए। उनका जीवन सतनाम बौद्धिक क्रांति का प्रतीक है।”

सतनाम आंदोलन का ऐतिहासिक महत्व

एसोसिएशन के महासचिव श्री विजय कुमार रात्रे ने अपने विचार रखते हुए कहा, “बाबा गुरु घासीदास जी ने सतनाम रावटी के माध्यम से पूरे छत्तीसगढ़ में सतनाम आंदोलन को एक जन आंदोलन का रूप दिया। उनके प्रयासों का परिणाम है कि छत्तीसगढ़ आज शांति और भाईचारे का प्रतीक बन गया है। उनका आंदोलन सामाजिक, बौद्धिक और आर्थिक दृष्टि से आमूलचूल परिवर्तन का वाहक बना।”

समारोह में प्रस्तुत विचार और प्रेरणादायक संदेश

कार्यक्रम में संगठन के अन्य प्रमुख सदस्यों ने भी अपने विचार व्यक्त किए:

  • कार्यकारी अध्यक्ष श्री चेतन लाल राणा: उन्होंने गुरु घासीदास जी के आदर्शों को आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया।
  • उपाध्यक्ष श्री वेद प्रकाश सूर्यवंशी और कोषाध्यक्ष श्री अनिल कुमार खेलवार: इन सदस्यों ने गुरु जी के समानता और मानवता के आदर्शों को समाज में प्रसारित करने की अपील की।
  • जोनल सचिव श्री उत्तम मंडावी: उन्होंने गुरु घासीदास जी की शिक्षाओं को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम संचालन और धन्यवाद ज्ञापन

कार्यक्रम का संचालन महासचिव श्री विजय कुमार रात्रे ने कुशलतापूर्वक किया। उन्होंने सभी वक्ताओं और उपस्थित लोगों का धन्यवाद किया। धन्यवाद ज्ञापन जोनल सचिव श्री उत्तम मंडावी ने किया।

प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति

समारोह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की। इनमें संगठन के उपाध्यक्ष श्री कुमार भारद्वाज, श्री शशांक प्रसाद, श्री रमेश चंदवानी, संगठन सचिव श्री परमेश्वर कुर्रे, उपकोषाध्यक्ष श्री नरेश चंद्र, जोनल सचिव श्री संजय कुमार, श्री कुंज लाल ठाकुर, श्री यशवंत नेताम, श्री एम एल राय, श्री धर्मपाल, श्री जितेंद्र कुमार भारती, और श्री मुक्तावन दास शामिल थे।

गुरु घासीदास जी का जीवन: प्रेरणा का स्रोत

गुरु घासीदास जी का जीवन न केवल समाज सुधार का प्रतीक था, बल्कि उनके सिद्धांत मानवीय मूल्यों की नींव हैं। सत्य, अहिंसा, शांति, समानता, प्रेम और करुणा जैसे मूल्यों को आत्मसात कर उन्होंने समाज में एक नई चेतना का संचार किया। उनके द्वारा प्रचारित ‘सतनाम’ दर्शन ने लोगों को नैतिकता और सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

समाज में उनकी शिक्षाओं की प्रासंगिकता

आज भी, गुरु घासीदास जी की शिक्षाएं समाज में समानता और एकता के लिए प्रासंगिक हैं। उनके सिद्धांत न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणादायक हैं। यह जयंती समारोह उनके आदर्शों को समझने और उन्हें समाज में प्रसारित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बना।

समारोह की प्रमुख उपलब्धियां

इस भव्य आयोजन ने समाज को एकजुटता, समानता और शांति का संदेश दिया। कार्यक्रम में प्रस्तुत विचार और चर्चाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी।

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