
दीपावली पर काली और गौरी-गौरा पूजन का महत्व
- दीपावली पर छत्तीसगढ़ की प्राचीन परंपराओं में गौरी-गौरा विवाह और काली पूजा का आयोजन खास होता है।
- वैशाली नगर में इस परंपरा को बड़ी धूमधाम से मनाया गया, जिसमें विधायक रिकेश सेन ने अपनी सहभागिता दिखाई।
- इन पूजन में शिव और पार्वती की मिट्टी की मूर्तियों को प्रतीक मानकर उनकी स्थापना और पूजन किया जाता है।
विधायक रिकेश सेन ने 7 कालीबाड़ी और 60 गौरी-गौरा पूजन में हिस्सा लिया
- 31 अक्टूबर की रात विधायक रिकेश सेन ने वैशाली नगर के कई इलाकों में पहुंचकर मां काली की पूजा में भाग लिया।
- काली पूजा में उन्होंने सेक्टर-6, हाऊसिंग बोर्ड, कोहका, नेहरू नगर, और स्मृति नगर जैसे स्थानों का दौरा किया।
- गुरुवार और शुक्रवार को 60 से अधिक गौरी-गौरा पूजन कार्यक्रमों में भी उनकी उपस्थिति रही, जहां उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ पूजा-अर्चना की।
गौरी-गौरा विवाह का आयोजन और शोभायात्रा
- छत्तीसगढ़ में गौरी-गौरा को शिव-पार्वती का प्रतीक मानकर उनका विवाह समारोह आयोजित किया जाता है।
- इस आयोजन में लोक गीत और नृत्य का महत्व होता है, जो पारंपरिक छत्तीसगढ़ी संस्कृति का प्रतीक हैं।
- शुक्रवार और शनिवार को दोनों दिन गौरी-गौरा का विसर्जन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और शोभायात्रा निकाली।
परंपरा और श्रद्धालुओं की आस्था
- छत्तीसगढ़ की प्राचीन परंपराओं में गौरी-गौरा विवाह का विशेष महत्व है, जिसे आदिवासी समाज ने आरंभ किया था।
- इस आयोजन में सभी समुदायों के लोग हिस्सा लेते हैं और इसे मिलजुलकर मनाते हैं।
- श्रद्धालु पारंपरिक गाड़ा बाजा और जसगीत गाते हुए, तालाबों में प्रतिमाओं का विसर्जन करते हैं, जो समृद्धि और सुख-शांति की कामना का प्रतीक है।
विधायक की अपील और आशीर्वाद
- विधायक रिकेश सेन ने इस मौके पर सभी लोगों की सुख-समृद्धि की कामना की।
- उन्होंने कहा कि गौरी-गौरा पूजन और काली पूजा सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपराओं को जीवित रखता है।
- उन्होंने इस आयोजन में शामिल सभी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया और उनकी मंगलकामना की।
छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण
- विधायक रिकेश सेन ने छत्तीसगढ़ की इस पारंपरिक परंपरा के महत्व को स्वीकार किया और इसे सभी समुदायों का आयोजन बताया।
- उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन सांस्कृतिक धरोहरों को बचाए रखने में सहायक हैं।
- गौरी-गौरा पूजा का यह पर्व विभिन्न जातियों और समुदायों को जोड़ता है और समर्पण का प्रतीक है।
समापन
छत्तीसगढ़ में दीपावली पर गौरी-गौरा विवाह और काली पूजन का आयोजन स्थानीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। विधायक रिकेश सेन ने इस मौके पर उपस्थित होकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं के साथ मिलकर सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया।
