
प्रशासन ने बरती सख्ती, खरीदी केंद्रों की स्थिति बदतर
जिले में बंपर धान की आवक के बावजूद धान उठाव में कमी से परेशान जिला प्रशासन ने गुरुवार को दो राइस मिलों में छापामारी की। इस कार्रवाई से नाराज मिलर डीएमओ कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन करने लगे। उन्होंने राज्य सरकार से हुई सुलह के बिंदुओं का हवाला देते हुए धान उठाव रोकने का ऐलान कर दिया।
प्रशासन और मिलर्स के बीच तनातनी
कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी के निर्देश पर तहसीलदार प्रफुल्ल गुप्ता ने जेवरा सिरसा की दो राइस मिलों में छापामारी की। इस दौरान स्टॉक मिलान और अन्य बिंदुओं की जांच की गई। प्रशासन की इस सख्ती से मिलर्स में हड़कंप मच गया। इसके बाद सैकड़ों मिलर्स ने डीएमओ कार्यालय का घेराव कर ज्ञापन सौंपा।
धान उठाव में लापरवाही से किसान परेशान
जिले के 90 धान खरीदी केंद्र पूरी तरह भरे हुए हैं। किसानों को टोकन नहीं मिल रहे, और धान सुरक्षित रखने में समस्याएं हो रही हैं। घर में जगह न होने से किसानों का धान खराब हो रहा है।
“धान को चूहे चट कर रहे हैं। घर में जगह न होने से भारी नुकसान होगा। प्रशासन को जल्द कदम उठाना चाहिए।”
— रेवतीलाल निषाद, किसान
खरीदी प्रक्रिया पर सवाल
मौखिक आदेशों का खेल
प्रदेश से सोसायटियों को मौखिक आदेश दिए जा रहे हैं। खरीदी की रोजाना सीमा घटाई जा रही है। जहां पहले 700 क्विंटल खरीदी होती थी, अब 300 क्विंटल तक सीमित कर दिया गया है।
धान उठाव का धीमा प्रबंधन
अब तक पंजीकृत किसानों में से केवल 16% धान की खरीदी हो पाई है।
- 102 खरीदी केंद्रों में से 90 में जगह नहीं।
- दिसंबर और जनवरी में 44 दिनों की खरीदी तय है।
- प्रतिदिन 2 लाख क्विंटल की दर से खरीदी जरूरी, लेकिन वास्तविकता में 1 लाख क्विंटल तक सीमित।
मिलरों की प्रमुख मांगें
गुरुवार को डीएमओ कार्यालय में ज्ञापन सौंपते हुए राइस मिलर्स संघ ने इन मांगों को रखा:
- कस्टम मिलिंग भुगतान और पिछले वर्षों की बकाया राशि का निपटारा।
- फोर्टिफाइड राइस और ट्रांसपोर्टेशन का भुगतान।
- धान उठाव पर पेनल्टी समाप्त करना।
- आगामी खरीफ वर्ष के लिए प्रोत्साहन राशि पर स्पष्ट आदेश।
क्या बोले मिलर?
“जब तक सरकार आदेश जारी नहीं करती, तब तक एग्रीमेंट नहीं होगा।”
— विनीत जैन, अध्यक्ष, जिला राइस मिल संघ
फसल बचाने की चुनौती
धान की कटाई के बाद सुरक्षित भंडारण न होने से किसानों का नुकसान बढ़ता जा रहा है।
- टोकन न मिलने से नाराजगी।
- धान सड़ने और चूहों द्वारा खराब होने की शिकायत।
राजनांदगांव जिले में धान उठाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन दुर्ग जिले में प्रशासनिक लापरवाही से किसान त्रस्त हैं।
अब आगे क्या ?
यदि प्रशासन और मिलर अपनी जिम्मेदारियों को नहीं निभाते, तो आने वाले दिनों में खरीदी प्रक्रिया ठप हो सकती है। इससे न केवल किसानों को नुकसान होगा, बल्कि सरकार की नीतियों पर भी सवाल खड़े होंगे।
क्या प्रशासन और मिलर किसानों की समस्याओं का समाधान करेंगे, या ये विवाद और बढ़ेगा?
आपकी राय हमें जरूर बताएं।
