
दुर्ग जिले के भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के सेक्टर-9 अस्पताल में संविदा नर्स का चेंजिंग रूम में वीडियो बनाए जाने की घटना ने पूरे अस्पताल में हड़कंप मचा दिया है। इस घटना में शामिल आरोपी को तुरंत पकड़ा गया और बीएसपी प्रबंधन ने उसे नौकरी से हटा दिया। हालांकि, पीड़ित नर्स और उसके परिवार ने बदनामी के डर से पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई।
चेंजिंग रूम में संविदा नर्स का वीडियो बनाने की कोशिश
घटना 28 दिसंबर को सेक्टर-9 अस्पताल में पं. जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र में घटी। एक संविदा कर्मचारी ने आईसीयू में बने चेंजिंग रूम के रोशनदान से नर्स का वीडियो बनाने की कोशिश की। जब यह हरकत चल रही थी, एक सतर्क नर्सिंग स्टाफ ने आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया।
उसके बाद, नर्सिंग स्टाफ ने आरोपी का मोबाइल छीनकर प्रबंधन को सौंप दिया। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने नर्स और उसके परिवार से बात कर मामले की जानकारी दी। नर्स से कहा गया कि वह पुलिस में शिकायत दर्ज कराए, लेकिन बदनामी के डर से शिकायत दर्ज नहीं हुई।
प्रबंधन ने लिया तत्काल एक्शन
घटना के तुरंत बाद, बीएसपी के प्रबंधन ने आरोपी कर्मचारी का मोबाइल जब्त किया और उसमें से वीडियो डिलीट कर दिया। ईडी मेडिकल डॉ. रविंद्र नाथ ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनीता द्विवेदी की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी गठित की। कमेटी ने नर्सिंग स्टाफ और उनके परिजनों से बातचीत कर उन्हें इस घटना के हर पहलू की जानकारी दी।
बीएसपी के यूनियन नेताओं ने भी घटना पर कड़ी नाराजगी जताई। प्रबंधन ने यूनियन को आश्वस्त किया कि आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद आरोपी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।
पहले भी सामने आ चुके हैं वीडियो बनाने के आरोप
यह पहला मामला नहीं है जब इस तरह की घटना सामने आई हो। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी आरोपी ने कई बार नर्सिंग स्टाफ और इंटर्न का चेंजिंग रूम में वीडियो बनाया है। हालांकि, पहले की घटनाओं को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था।
नर्सिंग स्टाफ में इस घटना के बाद डर और आक्रोश का माहौल है। उन्हें यह चिंता सता रही है कि उनके भी वीडियो बनाए गए हो सकते हैं। नर्सिंग स्टाफ ने मांग की है कि आरोपी के मोबाइल की पूरी जांच हो और सभी वीडियो को पूरी तरह से डिलीट किया जाए।
एफआईआर दर्ज कराने से परिजनों का इनकार
बीएसपी के अधिकारियों ने पीड़ित नर्स और उनके परिवार से कहा कि वे इस मामले की शिकायत पुलिस थाने में दर्ज कराएं। प्रबंधन ने भरोसा दिया कि वे पूरी मदद करेंगे। लेकिन नर्स और उनके परिवार ने बदनामी के डर से एफआईआर दर्ज कराने से इनकार कर दिया।
इस मामले में प्रबंधन और यूनियन नेताओं के बीच बातचीत जारी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
बीएसपी प्रबंधन पर सवाल और नर्सिंग स्टाफ की सुरक्षा का मुद्दा
यह घटना न केवल संविदा कर्मचारियों की अनुशासनहीनता पर सवाल उठाती है, बल्कि अस्पताल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की कमी को भी उजागर करती है। यूनियन नेताओं ने बीएसपी प्रबंधन से सुरक्षा बढ़ाने और संविदा कर्मचारियों के बैकग्राउंड की जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।
इस घटना के बाद नर्सिंग स्टाफ के मनोबल पर गहरा असर पड़ा है। कई नर्सों ने अपने परिवार को इस घटना की जानकारी दी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की मांग की।
भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए सुझाव
- सीसीटीवी कैमरों की निगरानी: चेंजिंग रूम जैसे संवेदनशील स्थानों को सुरक्षित बनाने के लिए सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था की जानी चाहिए।
- कर्मचारियों का मानसिक स्वास्थ्य आकलन: संविदा कर्मचारियों की भर्ती से पहले उनके व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य का परीक्षण अनिवार्य होना चाहिए।
- सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई: इस प्रकार की घटनाओं के लिए कठोर दंड और तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
- नर्सिंग स्टाफ की काउंसलिंग: ऐसी घटनाओं के बाद प्रभावित कर्मचारियों को मानसिक समर्थन और काउंसलिंग प्रदान की जानी चाहिए।
निष्कर्ष
बीएसपी अस्पताल में हुई यह घटना न केवल प्रबंधन की चूक को उजागर करती है, बल्कि संविदा कर्मचारियों के अनुशासन पर भी सवाल खड़े करती है। हालांकि आरोपी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है, लेकिन यह समाधान का अंतिम उपाय नहीं है। प्रबंधन को सुरक्षा व्यवस्था में सुधार करने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
अस्पताल प्रबंधन, यूनियन नेताओं और नर्सिंग स्टाफ को मिलकर काम करना होगा, ताकि न केवल अस्पताल का कार्यस्थल सुरक्षित हो, बल्कि कर्मचारियों का मनोबल भी मजबूत बना रहे।
