राजनांदगांव : 98  धान खरीदी केंद्रों पर संकट: सत्यापन में गड़बड़ी, फर्जीवाड़े के आरोप, खरीदी बंद

राजनांदगांव : 98 धान खरीदी केंद्रों पर संकट: सत्यापन में गड़बड़ी, फर्जीवाड़े के आरोप, खरीदी बंद

राजनांदगांव : 98  धान खरीदी केंद्रों पर संकट: सत्यापन में गड़बड़ी, फर्जीवाड़े के आरोप, खरीदी बंद

राजनांदगांव जिले में धान खरीदी केंद्रों पर छाए संकट ने किसानों और सहकारी समितियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। रामपुर धान खरीदी केंद्र पर फर्जी तरीके से धान खरीदी के गंभीर आरोपों के बाद जिला सहकारी समिति ने अनिश्चितकालीन बंद का ऐलान कर दिया है। इस विवाद ने न केवल प्रशासन और समितियों के बीच खाई पैदा की है, बल्कि हजारों किसानों को भी मुश्किल में डाल दिया है।

फर्जी धान खरीदी के आरोप और सत्यापन विवाद

गुरुवार को रामपुर धान खरीदी केंद्र में सत्यापन के दौरान खाद्य विभाग की टीम ने भारी अनियमितताओं का खुलासा किया। जांच में पाया गया कि केंद्र में 6768 बोरे धान कम हैं, जो फर्जी खरीदी की ओर इशारा करता है। इस खुलासे के बाद जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

हालांकि, सहकारी समिति प्रबंधकों ने सत्यापन प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण बताते हुए इसका विरोध किया। उनके अनुसार, सत्यापन के दौरान गिनती में जानबूझकर गड़बड़ी की गई है। समिति का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण है और उनका उद्देश्य समितियों को निशाना बनाना है।

समिति प्रबंधकों का विरोध और प्रदर्शन

रामपुर धान खरीदी केंद्र पर हुई कार्रवाई के विरोध में गुरुवार को बनभेड़ी में सहकारी समितियों ने जिला प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। समिति प्रबंधकों और कर्मचारियों ने प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की।

सहकारी समिति कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही, संघ ने सामूहिक इस्तीफे की पेशकश करते हुए 9 जनवरी से जिले के सभी 96 धान खरीदी केंद्रों को अनिश्चितकाल के लिए बंद रखने का ऐलान किया।

किसानों पर संकट के बादल

धान खरीदी केंद्रों के बंद होने से जिले के किसानों की परेशानी बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से 31 जनवरी तक धान खरीदी की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। लेकिन अब तक 30% किसानों ने अपना धान नहीं बेचा है।

किसानों को 9 जनवरी का टोकन जारी कर दिया गया था, लेकिन खरीदी केंद्रों पर ताले लगने के कारण उनकी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। कई किसानों का कहना है कि अगर यह विवाद जल्द सुलझा नहीं तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

प्रशासन और समितियों के बीच टकराव

प्रशासन और सहकारी समितियों के बीच इस टकराव ने धान खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह से बाधित कर दिया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने फर्जी धान खरीदी के खिलाफ कार्रवाई को आवश्यक बताया है। वहीं, सहकारी समितियों का दावा है कि सत्यापन में गड़बड़ी जानबूझकर की गई है।

सहकारी समिति का बयान:

“हमारी मांग है कि सत्यापन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो। हमें फंसाने की कोशिश की जा रही है। यह किसानों और समितियों के खिलाफ षड्यंत्र है।”

प्रशासन का पक्ष:

“फर्जी धान खरीदी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सत्यापन में जो गड़बड़ी सामने आई है, उसके आधार पर कार्रवाई आवश्यक है। किसी के दबाव में निर्णय नहीं लिया जाएगा।”

समस्या का समाधान जरूरी

धान खरीदी प्रक्रिया में उत्पन्न यह विवाद न केवल किसानों को आर्थिक संकट में डाल रहा है, बल्कि जिले की समग्र कृषि व्यवस्था को भी प्रभावित कर रहा है। जिला प्रशासन और सहकारी समितियों के बीच समाधान की सख्त जरूरत है। अगर जल्द ही इसका हल नहीं निकाला गया, तो यह विवाद और गहराएगा।

निष्कर्ष

राजनांदगांव जिले में धान खरीदी केंद्रों का बंद होना किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती है। सत्यापन प्रक्रिया की पारदर्शिता और फर्जी धान खरीदी जैसे मुद्दों पर प्रशासन और समितियों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। किसानों की मेहनत और उनकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह विवाद जल्द सुलझना चाहिए।

अब सवाल यह है कि प्रशासन और समितियां क्या मिलकर किसानों की समस्याओं का हल निकाल पाएंगी, या यह विवाद और लंबा खिंचेगा?

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