
धान खरीदी की धीमी प्रक्रिया ने छत्तीसगढ़ के किसानों को गहरी चिंता में डाल दिया है। 15 दिनों में सिर्फ 13% पंजीकृत रकबे पर खरीदी होना इस बात का प्रमाण है कि प्रशासनिक व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। यदि यही स्थिति रही, तो आगामी ढाई माह में केवल 52% पंजीकृत रकबे पर ही धान खरीदा जा सकेगा।
धान खरीदी की धीमी गति: आंकड़ों की सच्चाई
धान खरीदी प्रक्रिया की मौजूदा स्थिति बताती है कि अब तक सिर्फ 16,456 हेक्टेयर में 12,23,830 क्विंटल धान की खरीदी हुई है। नवंबर के 13 दिनों और दिसंबर के 2 दिनों को मिलाकर कुल 15 दिन खरीदी का काम हुआ।
- पंजीकृत रकबा: 1,22,383 हेक्टेयर
- कुल पंजीकृत किसान: 1,14,787
- प्रति हेक्टेयर खरीदी: 77.50 किलोग्राम
सरकार ने 14 नवंबर से धान खरीदी शुरू की थी, लेकिन सिर्फ 13% रकबे पर खरीदी होने से किसानों की परेशानियां बढ़ रही हैं। दिसंबर और जनवरी में 44 दिनों की खरीदी बची है, लेकिन छुट्टियों और प्रशासनिक देरी से लक्ष्य पूरा होना मुश्किल है।
किसानों की समस्याएं:
- ऑनलाइन टोकन का संकट:
राज्य सरकार ने 60% ऑनलाइन टोकन और 40% सोसायटी टोकन का प्रावधान किया, लेकिन ऑनलाइन प्रक्रिया में तकनीकी समस्याओं से किसान परेशान हैं।- टोकन मिलने में देरी
- 7 दिनों बाद की तारीख मिलने से उपज का प्रबंधन चुनौतीपूर्ण
- धान सूखने का खतरा:
परिवहन में देरी और खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था के कारण धान के सूखने और गुणवत्ता खराब होने का जोखिम है। - अनियमितता का आरोप:
कुछ समितियां किसानों के धान से ज्यादा कटौती कर रही हैं।- 40 किलो के बारदानों में अतिरिक्त 680 ग्राम धान की छूट का दुरुपयोग हो रहा है।
- किसानों को कम भुगतान कर उनकी मेहनत पर डाका डाला जा रहा है।
राजनैतिक बयानबाजी: कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने
किसानों की समस्याओं पर अब विपक्ष ने भी आवाज उठाई है।
- कांग्रेस का निरीक्षण:
पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू, विधायक अरुण वोरा, और अन्य नेताओं ने विभिन्न धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण कर किसानों की समस्याओं का जायजा लिया।- आरोप: सरकार किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है।
- मांग: खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी लाई जाए।
- भाजपा का हमला:
भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने निगरानी समिति गठित करने की मांग की है।- उन्होंने कहा कि प्रशासन की लापरवाही से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।
- “धान खरीदी में अनियमितता रोकने के लिए सख्त निगरानी जरूरी है।”
समाधान की राह: प्रशासन की जिम्मेदारी
किसानों की समस्याओं को हल करने और धान खरीदी की प्रक्रिया को गति देने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
- टोकन वितरण में सुधार:
टोकन की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया जाए। - निगरानी समिति का गठन:
धान खरीदी में अनियमितता रोकने और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए निगरानी समितियों की स्थापना हो। - अतिरिक्त खरीदी केंद्रों की स्थापना:
किसानों की संख्या को देखते हुए और केंद्र स्थापित किए जाएं। - छुट्टियों में काम:
छुट्टियों के दौरान भी धान खरीदी जारी रखकर देरी को कम किया जाए।
निष्कर्ष
धान खरीदी की धीमी प्रक्रिया और प्रशासनिक अव्यवस्था ने किसानों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। यदि जल्द ही कदम नहीं उठाए गए, तो किसान अपनी मेहनत और उपज का सही मोल पाने से वंचित रह जाएंगे। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे इस मुद्दे को प्राथमिकता देकर किसानों को राहत पहुंचाने का काम करें।
किसान हितों की रक्षा करना केवल सरकार का दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास का आधार भी है।
