
सरकार ने कलेक्टर की मांग पर दी अनुमति:
दुर्ग – जिले के खरीदी केंद्रों में जाम की स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने कलेक्टर की मांग पर एक बड़ा फैसला लिया है। अब 80% चावल जमा कर चुके मिलर्स भी धान का उठाव कर सकेंगे। यह कदम किसानों और खरीदी केंद्रों के लिए राहत भरा साबित होगा।
जाम से निपटने की योजना
धान खरीदी केंद्रों में समयबद्ध धान उठाव न होने से स्थिति जटिल हो रही थी। अब तक, केवल उन्हीं मिलर्स को कस्टम मिलिंग की अनुमति थी, जिन्होंने शत-प्रतिशत चावल जमा किया था। लेकिन इस बार, 80% चावल जमा कर चुके मिलर्स को भी अनुमति दी गई है, जिससे धान उठाव प्रक्रिया में तेजी आएगी।
कस्टम मिलिंग की प्रक्रिया क्या है?
किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदा गया धान मिलर्स द्वारा कस्टम मिलिंग के माध्यम से चावल में बदला जाता है।
- पंजीकरण: मिलर्स को खाद्य विभाग में पंजीयन कराना होता है।
- अनुबंध: सशर्त अनुबंध के बाद मिलिंग क्षमता के आधार पर धान उठाव की अनुमति दी जाती है।
- समय सीमा: मिलिंग के बाद तय समय में चावल सरकारी गोदामों में जमा कराना अनिवार्य होता है।
चुनौतियां: इस प्रक्रिया को नए खरीदी सीजन से पहले पूरा करना होता है। लेकिन, जिले के कई मिलर्स इस बार समय पर चावल जमा नहीं कर पाए।
प्रदेश में स्थिति गंभीर: 14 लाख टन चावल बकाया
जिले के साथ-साथ प्रदेश में भी बड़ी मात्रा में चावल जमा नहीं हो पाया है।
- 14 लाख मीट्रिक टन चावल बकाया है।
- नान और एफसीआई जैसे विभागों में 10.62 लाख टन अरवा चावल और 2.98 लाख टन उसना चावल अब भी जमा नहीं किया गया।
मिलर्स को मिली राहत: रेक की कमी बनी चुनौती
कलेक्टर ने खाद्य विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा को पत्र लिखकर इस समस्या पर ध्यान आकृष्ट किया।
- समस्या: एफसीआई द्वारा समय पर रेक उपलब्ध न कराने से चावल जमा कराने में देरी हो रही है।
- हल: मिलर्स को बकाया चावल नए कस्टम मिलिंग के साथ जमा करने की अनुमति दी गई।
पुराने मिलर्स की समस्या: नए नियमों से उलझन
राज्य सरकार ने इस बार पंजीकरण के लिए प्रोडक्शन सर्टिफिकेट को अनिवार्य कर दिया है।
- तकनीकी खामी: 2014 से पहले स्थापित मिलों के पास यह सर्टिफिकेट ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है।
- सुधार: तकनीकी दिक्कतें दूर होने के बाद अब 10 मिलर्स का पंजीयन हो चुका है ।
आगे क्या ….?
सरकार के इस कदम से किसानों और मिलर्स दोनों को राहत मिलेगी। खरीदी केंद्रों का संचालन सुचारू होगा और धान उठाव में तेजी आएगी। हालांकि, तकनीकी खामियों और रेक की कमी जैसे मुद्दों पर जल्द समाधान की आवश्यकता है।
क्योंकि समय पर धान उठाव ही किसानों और सरकारी व्यवस्था के लिए लाभकारी साबित होगा।
