
जामुल, भिलाई:
3 दिसंबर को विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर तुलसी लोक विकास संस्थान द्वारा संचालित दिव्य ज्योति निःशुल्क नेत्रहीन विद्यालय में “उज्जवल कार्यक्रम” के तहत भव्य खेलकूद एवं सांस्कृतिक आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम ने बच्चों में उत्साह और आत्मविश्वास का संचार किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और सहयोगी
इस विशेष आयोजन में समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने शिरकत की और बच्चों को प्रेरित किया:
- श्री आनंद त्रिपाठी (अध्यक्ष, कृष्ण इंजीनियरिंग कॉलेज)
- डॉ. मानसी गुलाटी (स्त्री रोग विशेषज्ञ और समाजसेवी)
- श्री प्रमोद सिंह (सांसद प्रतिनिधि)
- श्री रेखराम बंछोर (पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष और पार्षद, जामुल)
- श्री परमिंदर सिंह (बीएसपी के जनरल सेक्रेटरी)
इन सभी अतिथियों ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया और कार्यक्रम की सराहना की।
कार्यक्रम की झलकियां
1. सांस्कृतिक प्रस्तुतियां:
- बच्चों ने शानदार गीत-संगीत और नृत्य प्रस्तुतियां दीं।
- पंथी नृत्य और सुआ नृत्य ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
2. खेलकूद गतिविधियां:
बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए विभिन्न खेल आयोजित किए गए:
- तेज चाल प्रतियोगिता
- 50 मीटर रेस
- गोला फेंक
इन खेलों ने बच्चों में प्रतिस्पर्धा और आत्मबल का संचार किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन
यह आयोजन दिव्य ज्योति नेत्रहीन विद्यालय की संचालिका श्रीमती संध्या द्विवेदी के नेतृत्व में किया गया।
- संस्था के सदस्य अविनाश प्रधान, प्रिंसिपल सौम्या द्विवेदी, और पूरे स्टाफ ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- विद्यालय, जो बोगदा पुलिया के पास, जामुल भिलाई में स्थित है, लगातार दिव्यांग बच्चों के विकास के लिए काम कर रहा है।
मुख्य अतिथियों का संदेश
मुख्य अतिथियों ने बच्चों की प्रतिभा को सराहा और कहा:
- “इस तरह के आयोजनों से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है। यह कार्यक्रम हमें दिखाता है कि दिव्यांगता किसी भी सफलता में बाधा नहीं बन सकती।”
- डॉ. मानसी गुलाटी ने समाज को दिव्यांगों के प्रति जागरूक होने का संदेश दिया।
- श्री आनंद त्रिपाठी ने विद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान समाज में बदलाव का उदाहरण है।
निष्कर्ष
दिव्य ज्योति नेत्रहीन विद्यालय द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल बच्चों के लिए एक उत्सव था, बल्कि उनके लिए प्रेरणा और आत्मनिर्भरता का संदेश भी था।
तुलसी लोक विकास संस्थान ने दिव्यांग बच्चों की क्षमताओं को निखारने और समाज को उनके प्रति संवेदनशील बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास किया है।
दिव्यांग बच्चों को प्रोत्साहित करना और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना, एक सशक्त समाज की पहचान है।
