
भिलाई नगर, 16 नवंबर।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया मोड़ आया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन के बीच सोशल मीडिया पर चल रहा विवाद सुर्खियों में है। इस विवाद की शुरुआत एक स्कूल बंद करने के आरोपों को लेकर हुई थी, लेकिन अब मामला शराब घोटाला, भ्रष्टाचार और भाजपा-कांग्रेस के आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच चुका है।
क्या है विवाद का पूरा मामला?
हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि सरकार ने “मनपसंद ऐप” और रेस्टोरेंट में खुलेआम शराब बिक्री को क्यों अनुमति दी। उन्होंने इसे जनता के खिलाफ एक फैसला बताते हुए कहा कि इससे राज्य में शराब माफियाओं का हौसला बढ़ा है।
भूपेश बघेल ने कहा:
“जब से मैंने भाजपा सरकार के इस कदम का विरोध किया है, तबसे इनका सिस्टम हिल गया है। ‘मनपसंद ऐप’ के ब्रांड एम्बेसडर अब विधायकों से मेरे खिलाफ शिकायत करवा रहे हैं। विधायक तो केवल मोहरा हैं, असल खेल शराब माफियाओं का है।”
रिकेश सेन का पलटवार
भूपेश बघेल के इस बयान पर वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा:
“जो जेल में बंद हैं, वो आपके हैं कौन? आपके कार्यकाल में जो अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त थे, वे अब जेल की सलाखों के पीछे हैं। यह दिखाता है कि आपके शासनकाल में छत्तीसगढ़ को किस तरह लूटा गया।”
रिकेश ने आगे आरोप लगाया कि भूपेश बघेल के शासनकाल में ढाई हजार करोड़ के शराब घोटाले को अंजाम दिया गया। उन्होंने कहा कि घोटालेबाजों ने नकली शराब और नकली होलोग्राम के जरिए छत्तीसगढ़ के राजस्व को चूना लगाया।
शराब घोटाले का जिक्र क्यों?
छत्तीसगढ़ में हाल ही में उजागर हुआ शराब घोटाला राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। ढाई हजार करोड़ के इस घोटाले में कई अधिकारी और लोग जेल में हैं। रिकेश सेन ने भूपेश बघेल पर निशाना साधते हुए कहा:
“आपके शासनकाल में जो भ्रष्टाचार हुआ, उसके जिम्मेदार आपके अधिकारी और सलाहकार हैं।”
भूपेश बघेल के आरोपों की राजनीति
भूपेश बघेल ने इस मामले में भाजपा सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि विधायक और अधिकारी केवल मोहरा हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि:
- “भाजपा सरकार शराब माफियाओं के साथ मिली हुई है।”
- “मनपसंद ऐप का इस्तेमाल कर शराब की अवैध बिक्री हो रही है।”
- “छत्तीसगढ़ की जनता के साथ धोखा हो रहा है।”
विधायक रिकेश सेन की चुनौती
विधायक रिकेश सेन ने पूर्व मुख्यमंत्री के इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि:
- “भाजपा में कोई मोहरा नहीं है।”
- “भूपेश बघेल खुद अपने शासनकाल में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार हैं।”
- “छत्तीसगढ़ की जनता को अब सच जानने का समय आ गया है।”
क्या कहती है जनता?
इस पूरे विवाद के बाद जनता की नज़र इस बात पर है कि छत्तीसगढ़ सरकार इन आरोप-प्रत्यारोपों से हटकर राज्य के विकास और पारदर्शिता की दिशा में क्या कदम उठाती है।
आगे क्या होगा?
छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह विवाद केवल एक शुरुआत है। शराब घोटाला, भ्रष्टाचार के आरोप, और विकास से जुड़े सवाल आने वाले चुनावों में प्रमुख मुद्दे बन सकते हैं। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच, जनता यह देखना चाहती है कि कौन से नेता उनके हित में काम करेंगे और कौन केवल राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगे हैं।
राजनीतिक चर्चा जारी है, लेकिन क्या यह चर्चा राज्य के विकास में योगदान देगी, यह देखना बाकी है।
