The CG ख़बर | छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में जो हुआ, वह सिर्फ एक मारपीट की घटना नहीं है—यह उस खतरनाक मानसिकता का खुला प्रदर्शन है, जिसमें राजनीतिक पहचान को कानून से ऊपर मान लिया गया है।
BJP नेता जितेंद्र कुजूर (मोनू) द्वारा एक पटवारी को सिर्फ मोबाइल नंबर के विवाद में बेरहमी से पीटना… और वह भी सरकारी दफ्तर में घुसकर—यह सवाल खड़ा करता है कि क्या अब सरकारी कर्मचारी भी सुरक्षित नहीं हैं?
“नंबर खुद मिला लो…” और टूट पड़ा सत्ता का अहंकार
ग्राम कंठी में पटवारी प्रकाश मंडल अपने दफ्तर में बैठे थे। आरोपी आया, आरआई का नंबर मांगा। जवाब मिला—दीवार पर लिखा है, खुद मिला लीजिए।
👉 बस… इतनी सी बात पर शुरू हो गई लात-घूंसे और डंडों की बौछार!
👉 बीच-बचाव करने वाले ऑपरेटर को भी पीटा गया
👉 जान बचाने के लिए पटवारी को कमरे में बंद होना पड़ा
🟥 यह सिर्फ गुस्सा नहीं था… यह “मैं जो चाहूं कर सकता हूं” वाली मानसिकता थी!
CCTV में कैद सच्चाई… झूठ की कोई गुंजाइश नहीं
पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई।
वीडियो वायरल हुआ… और फिर प्रशासन जागा।
👉 कलेक्टर अजीत वसंत के हस्तक्षेप के बाद FIR दर्ज
👉 देर रात आरोपी गिरफ्तार
🟨 बड़ा सवाल:
👉 अगर वीडियो सामने नहीं आता… तो क्या कार्रवाई होती?
👉 क्या हर पीड़ित को न्याय के लिए कैमरे की जरूरत पड़ेगी?
क्या यह पहली घटना है? या एक खतरनाक ट्रेंड?
सच कड़वा है… लेकिन नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हाल के समय में कई जगहों पर भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं/कार्यकर्ताओं के नाम—
◾ अफीम और मादक पदार्थों के मामलों
◾ अवैध जमीन कारोबार
◾ दबंगई और मारपीट
◾ सोशल मीडिया पर हथियारों के प्रदर्शन
में सामने आए हैं।
🟥 यह कहना गलत होगा कि सभी ऐसे हैं… लेकिन
🟥 बार-बार सामने आ रही घटनाएं “संयोग” नहीं लगतीं!
“क्या भाजपा के नेता सत्ता के नशे में चूर हो गए हैं?”
यही सबसे बड़ा और सबसे असहज सवाल है…
🟧 जब एक के बाद एक घटनाएं सामने आती हैं…
🟧 जब कानून को खुलेआम चुनौती दी जाती है…
🟧 जब सरकारी कर्मचारी तक असुरक्षित महसूस करने लगते हैं…
👉 तो जनता पूछती है—
“क्या सत्ता अब सेवा नहीं… दबंगई का लाइसेंस बन गई है ?
पटवारी संघ का अल्टीमेटम: अब चुप नहीं बैठेंगे!
पटवारी संघ ने साफ कहा है—
👉 सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, जुलूस निकालो!
👉 ऐसा उदाहरण बनाओ कि कोई दोबारा हिम्मत न करे
🟥 चेतावनी भी दे दी गई है—
👉 मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन होगा
भाजपा के लिए चेतावनी: अब भी नहीं संभले तो देर हो जाएगी
यह लेख किसी पार्टी को निशाना बनाने के लिए नहीं…
👉 बल्कि सच्चाई दिखाने के लिए है
लेकिन सवाल सीधा है—
🟨 भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को कब सिखाएगी कि
सत्ता सेवा का माध्यम है, दादागिरी का नहीं?
🟥 अगर ऐसे ही घटनाएं बढ़ती रहीं…
👉 तो नुकसान सिर्फ छवि का नहीं होगा
👉 जनता का भरोसा टूटेगा
अब कार्रवाई नहीं… “उदाहरण” चाहिए!
गिरफ्तारी हो गई…
लेकिन क्या इतना काफी है?
🟥 जरूरत है—
👉 सख्त सजा की
👉 सार्वजनिक जवाबदेही की
👉 और राजनीतिक इच्छाशक्ति की
अंतिम सवाल..
जो हर नागरिक पूछ रहा है
❗ “क्या भाजपा ऐसे नेताओं पर कड़ा एक्शन लेगी… या अगली घटना का इंतजार करेगी?”
👉 क्योंकि याद रखिए—
जनता सब देख रही है… और समय आने पर जवाब भी देती है।
