गहोई वैश्य समाज भिलाई-दुर्ग ने मनाई राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ‘दद्दा’ की जयंती

गहोई वैश्य समाज भिलाई-दुर्ग ने मनाई राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ‘दद्दा’ की जयंती


भिलाई। सावन की रिमझिम फुहारों के बीच साहित्य, संस्कृति और समाजसेवा का सुंदर संगम देखने को मिला। राष्ट्रकवि मैथिलीशरणगुप्तदद्दा की जयंती पर गहोई वैश्य समाज भिलाई-दुर्ग ने ऐसा आयोजन किया, जिसमें शब्दों के माध्यम से राष्ट्रकवि को याद किया गया तो वहीं रक्तदान के जरिएमानवसेवा का संदेश भी दिया गया। नेहरू नगर स्थित सयान सदन में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के महिला-पुरुषों के साथ बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।

🪔 दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण से हुई शुरुआत

9 अगस्त 2026 को प्रातः 10 बजे शुरू हुए कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के चित्र पर दीपप्रज्वलनएवंमाल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई।

कार्यक्रम में गहोई वैश्य महासभा छत्तीसगढ़ के पूर्व अध्यक्ष एवं संरक्षक ब्रजेशबिचपुरिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। नंदूबिचपुरिया, डॉ. संध्यानगरियाएवंराकेशरूसिया विशेष अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता गहोई वैश्य समाज के अध्यक्ष विनयपिपरसानिया ने की।

◼️सरस्वती वंदना से काव्य प्रस्तुतियों तक

कार्यक्रम में सरस्वती वंदना के बाद स्वागत वक्तव्य और अतिथियों के उद्बोधन हुए। समाज के सदस्यों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति देकर राष्ट्रकवि को श्रद्धांजलि दी।

बालवृंद की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में नई ऊर्जा भर दी, जबकि महिला सदस्यों द्वारा प्रस्तुत काव्य रचनाओं ने साहित्यिक वातावरण को और समृद्ध किया।

कार्यक्रम का मंच संचालन आस्थासिंजारिया ने किया।

◼️35 से अधिक लोगों ने किया रक्तदान

कार्यक्रम का सबसे खास और प्रेरणादायी पहलू रहा रक्तदानशिविर। डॉ. संध्या नगरिया के मार्गदर्शन में सुबह 11 बजे से आयोजित शिविर में 35 से अधिकगहोईसमाज के सदस्योंनेरक्तदान किया।

समाजजनों ने रक्तदान को राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती पर मानवसेवा के रूप में समर्पितश्रद्धांजलि बताया। साहित्य के प्रति सम्मान के साथ समाजसेवा का यह प्रयास कार्यक्रम की विशेष पहचान बना।

दद्दा’ के विचारों को जीवन में उतारने का संदेश

मुख्य अतिथि ब्रजेशबिचपुरिया ने अपने संबोधन में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के जीवन, साहित्य और विचारों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ‘दद्दा’ ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाया, इसलिए उनके दिखाए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

झांसी महाकुंभ में भिलाई-दुर्ग से अधिक भागीदारी का आह्वान

ब्रजेश बिचपुरिया ने आगामी 17 जनवरी 2027 को झांसी में होने वालेगहोईमहाकुंभ का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि महाकुंभ में करीब 50 हजारलोगों की सहभागिता का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने भिलाई-दुर्ग के गहोई समाजजनों से बड़ी संख्या में झांसी पहुंचकर महाकुंभ को सफल बनाने का आह्वान किया।

बड़ी संख्या में समाजजन हुए शामिल

कार्यक्रम में समाज के उपाध्यक्ष राकेशबहारिया, विनोदलोहिया, रमनबिचपुरिया, पवन खारिया, रजत बेहरे, अशोकखंताल, संदीपगहोई, अरुणइरोदिया, राजदेवकनकने, गिरीशसिजारिया, विक्रममोदी, सर्वेशबिचपुरियाएवंदीदीरमापहरिया सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे।

इसके अलावा दीपककनकने, ज्योतिबिचपुरिया, सीमाबेहरे, राजेशनगरिया, ए.के. लोहिया, संजयपीपरसानिया, अरुणगुप्ता, राजीवनगरिया, प्रदीपगुप्ता, कवितागुप्ता, सुरेंद्र कुमार, राजेशदरिया, श्यामलालगुप्ता, वीरेंद्रभरसानिया, सुदीपसोनी, सुनील कुमार, प्रदीपगहोई, संजीवबिचपुरिया, मणिकांतगुप्ता, मनोज बिचपुरिया, ओमप्रकाशगुप्ता, राजेंद्र कुमार, शिवकुमार, नीरज, सतीशकनकने, ओमप्रकाशमरेले, उर्मिलामरेले, विनयगुप्ता, सुनील कुमार गुप्ता, रमेशबिचपुरिया, निकितागुप्ता, संध्यानगरिया, विक्रमगुप्ता, अनिल कुमार, सौरभगुप्ता, शेखरगुप्ता, लवलीगुप्ता, सवितागुप्ता, सुरभिखारिया, रोहितगुप्ता, हिमांशुगुप्ता, मनीषगुप्ता, आशीषसिजारियाएवंमोहन कुमार गुप्ता सहित बड़ी संख्या में समाज के सदस्य मौजूद रहे।

साहित्य को नमन, सेवा को समर्पण

गहोई वैश्य समाज भिलाई-दुर्ग का यह आयोजन केवल जयंती समारोह तक सीमित नहीं रहा। काव्य, संस्कृति और रक्तदान के माध्यम से कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि महापुरुषों की स्मृति को जीवंत रखने का सबसे सार्थक तरीका उनके आदर्शों को समाजसेवा से जोड़ना है। राष्ट्रकवि ‘दद्दा’ की जयंती पर आयोजित यह आयोजन इसी भावना का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया।

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