गांव से शहर तक चलेगा जागरूकता अभियान, डिजिटल अरेस्ट, UPI फ्रॉड, जॉब स्कैम और फिशिंग से बचाव के बताए जाएंगे तरीके
साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच दुर्ग पुलिस ने लोगों को जागरूक करने के लिए ‘साइबर जागृति अभियान’ की शुरुआत की है। 15 अगस्त से शुरू होने वाला यह अभियान 2 अक्टूबर, गांधी जयंती तक चलेगा। सात सप्ताह तक चलने वाले इस अभियान में स्कूल-कॉलेज से लेकर बैंक, रोजगार केंद्र, महिला समूह, ग्राम पंचायत और नगरीय निकायों तक लोगों को साइबर अपराध से बचने के उपाय बताए जाएंगे।
9 हजार के करीब साइबर ठगी के मामले
पुलिस के अनुसार दुर्ग जिले में साइबर अपराध के मामले लगातार चुनौती बने हुए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक करीब डेढ़ साल की अवधि में जिले में 9 हजार के आसपास साइबर ठगी के मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें वर्ष 2025 में लगभग 5,200 मामले, जबकि 2026 में 31 जुलाई तक करीब 3,520 मामले दर्ज किए गए।
पुलिस का कहना है कि लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों का असर दिखाई दे रहा है और इस वर्ष साइबर अपराध के मामलों में कुछ कमी आई है।
‘एक सेल्फी’ बनेगी जागरूकता का जरिया
अभियान की सबसे खास पहल ‘साइबर जागृति की एक सेल्फी’ है। इसके तहत छत्तीसगढ़ पुलिस और जिला पुलिस के सोशल मीडिया हैंडल्स पर उपलब्ध लिंक अथवा QR कोड स्कैन कर जागरूकता संदेश वाली सेल्फी फ्रेम प्राप्त की जा सकेगी।
लोग इस फ्रेम के साथ अपनी सेल्फी लेकर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सकेंगे। पुलिस का उद्देश्य है कि एक व्यक्ति की सेल्फी के माध्यम से साइबर सुरक्षा का संदेश उसके दोस्तों, फॉलोअर्स और परिवार तक पहुंचे और जागरूकता का दायरा लगातार बढ़े।
सात सप्ताह, सात प्रमुख अभियान
अभियान को सात सप्ताह में विभाजित किया गया है और प्रत्येक सप्ताह साइबर अपराध के अलग-अलग पहलुओं पर फोकस रहेगा।
पहला सप्ताह: स्कूल-कॉलेजों में डिजिटल सतर्कता और ऑनलाइन सुरक्षा की बुनियादी जानकारी दी जाएगी।
दूसरा सप्ताह: बैंकों और वित्तीय संस्थानों के माध्यम से वित्तीय धोखाधड़ी तथा UPI सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा।
तीसरा सप्ताह: वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने वाले डिजिटल अरेस्ट और फर्जी कॉल के मामलों पर टाउन हॉल कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
चौथा सप्ताह: महिला कॉलेजों और सामुदायिक समूहों के बीच स्मार्टफोन प्राइवेसी और सुरक्षित ब्राउजिंग को लेकर जागरूकता अभियान चलेगा।
पांचवां सप्ताह: युवाओं को जॉब फ्रॉड और फिशिंग से बचाने के लिए रोजगार कार्यालयों, ITI और कौशल विकास केंद्रों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
छठा सप्ताह: डेटा प्राइवेसी और सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा।
सातवां सप्ताह: ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में गांधी जयंती के अवसर पर ‘साइबर मुक्त छत्तीसगढ़’ का संकल्प अभियान चलाया जाएगा।
सोशल मीडिया से गांव की चौपाल तक पहुंचेगा संदेश
दुर्ग पुलिस अभियान के दौरान सोशल मीडिया, QR कोड, सेल्फी फ्रेम, पोस्टर-बैनर और WhatsApp ग्रुप जैसे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करेगी। इसके साथ ही विभिन्न संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
पुलिस का मानना है कि साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका सतर्कता और सही जानकारी है। ठगी के नए-नए तरीकों के बीच लोगों को जागरूक करना ही इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है।
एक सेल्फी, एक संदेश और हजारों लोगों तक साइबर सुरक्षा की पहुंच—इसी सोच के साथ दुर्ग पुलिस ने ‘साइबर जागृति अभियान’ को जनभागीदारी से जोड़ने की पहल की है।
