जिम संचालक आमीन मुलतानी ने रेंज IG के समक्ष कबूला : अब तक 9 महिलाओं के साथ संबंध बनाए, रुपए ऐंठे ।
The CG ख़बर| सूरत | सुरेंद्रनगर। कभी-कभी कागज के एक छोटे से टुकड़े पर लिखे चंद शब्द ऐसी हकीकत सामने ला देते हैं, जिसे जानकर इंसान की रूह कांप उठती है। “हमें बेटी समझकर जांच करना…” यह सिर्फ एक गुहार नहीं, बल्कि उन बेटियों की पीड़ा का बयान था, जिन्हें कथित तौर पर भरोसे के जाल में फंसाकर ब्लैकमेल किया जा रहा था।
गुजरात के सुरेंद्रनगर में जिला पुलिस प्रमुख प्रेमसुख डेलु को मिली इसी भावुक चिट्ठी के बाद चर्चित ‘क्लब 71 जिम’ पर पुलिस की कार्रवाई हुई। शुरुआती जांच में जो सामग्री सामने आई, उसने महिलाओं की सुरक्षा, निजी तस्वीरों के दुरुपयोग और भरोसे की आड़ में होने वाले शोषण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
◼️ जिम की आड़ में कथित खेल, जांच में मिले 1300 से ज्यादा फोटो-वीडियो
रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस की टीम ने जिम में छापा मारकर मोबाइल और पेनड्राइव सहित अन्य डिजिटल सामग्री की जांच की। इसमें करीब 100 युवतियों और महिलाओं से संबंधित 1300 से अधिक आपत्तिजनक फोटो-वीडियो मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, इनकी वास्तविक संख्या, सामग्री की प्रकृति और प्रत्येक मामले में संभावित पीड़ितों की स्थिति की पुष्टि जांच से होना बाकी है।
इस कार्रवाई में सुरेंद्रनगर की एएसपी वेदिका बिहानी और उनकी टीम की भूमिका सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिसकर्मी ग्राहक बनकर जिम पहुंचे और संचालक आमीन मुलतानी को हिरासत में लिया।
◼️ भरोसा जीतकर ब्लैकमेलिंग का आरोप, कई महिलाओं के शोषण की आशंका
मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, आरोपी पर आरोप है कि उसने जिम में आने वाली महिलाओं को अपने जाल में फंसाया, उनकी निजी तस्वीरें हासिल कीं और कथित तौर पर उनका इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया। यह भी बताया गया कि वीडियो कॉल के जरिए महिलाओं पर आपत्तिजनक स्थिति में आने का दबाव बनाया जाता था।
रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने राजकोट रेंज आईजी कार्यालय में पूछताछ के दौरान पिछले पांच वर्षों में करीब नौ विवाहित महिलाओं के साथ संबंध बनाने और उनसे आर्थिक लाभ लेने की बात स्वीकार की। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और कानूनी जांच आवश्यक है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित होना अभी बाकी है।
◼️ सवाल सिर्फ एक आरोपी का नहीं, उन बेटियों के सम्मान का है
इस पूरे मामले का सबसे दर्दनाक पहलू उन महिलाओं की निजता और मानसिक पीड़ा है, जिनकी तस्वीरों या वीडियो का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल हुआ। आखिर कोई महिला किसी संस्थान में व्यायाम करने, अपनी सेहत सुधारने या सामान्य जीवन जीने के लिए जाती है, तो क्या उसे इस बात का डर लेकर जीना चाहिए कि उसकी निजी जिंदगी किसी दूसरे के हाथों में हथियार बन जाएगी?
अगर जांच में महिलाओं को फंसाने, उनकी तस्वीरों से धमकाने या आर्थिक लाभ लेने के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि विश्वास और मानवीय गरिमा पर भी गंभीर हमला होगा।
ऐसे मामलों में आक्रोश जरूरी है, लेकिन पीड़िताओं की पहचान और सम्मान की रक्षा उससे भी ज्यादा जरूरी है। किसी महिला की निजी तस्वीरें उसकी सहमति के बिना साझा करना या उन्हें धमकी के लिए इस्तेमाल करना किसी भी परिस्थिति में सामान्य बात नहीं मानी जा सकती।
◼️ निष्पक्ष जांच और दोषियों को सख्त सजा की मांग
घटना के बाद जिला विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष रमेश भुतड़ा की अध्यक्षता में प्रतिनिधिमंडल द्वारा जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपे जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसमें मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और गहन जांच की मांग की गई।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती है—डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच, संभावित पीड़ित महिलाओं तक सुरक्षित तरीके से पहुंचना, आरोपों की पुष्टि करना और यदि कोई संगठित नेटवर्क सामने आता है, तो उसकी पूरी कड़ियों का पता लगाना।
क्योंकि इंसाफ सिर्फ आरोपी को पकड़ने से पूरा नहीं होता। इंसाफ तब पूरा होता है, जब पीड़ित महिला बिना डर के अपनी बात कह सके, उसकी निजता सुरक्षित रहे और दोष साबित होने पर अपराधी को कानून के मुताबिक सजा मिले।
‘हमें बेटी समझकर जांच करना’—इस गुहार का असली सम्मान यही होगा कि जांच संवेदनशीलता से हो, सच सामने आए और किसी भी पीड़िता को समाज के डर से चुप रहने के लिए मजबूर न होना पड़े।
