दुर्ग : छह साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपी को फांसी

दुर्ग : छह साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपी को फांसी

17 महीने बाद विशेष पॉक्सो कोर्ट का फैसला, चाचा सोमेश यादव को मृत्युदंड; हाईकोर्ट की पुष्टि तक केंद्रीय जेल दुर्ग में रहेगा आरोपी

The CG ख़बर ।दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में छह साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के बहुचर्चित मामले में करीब 17 महीने बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी सोमेश यादव को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने यह फैसला 10 सितंबर 2026 को सुनाया।

अदालत ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 6(1) और बीएनएस की धारा 103(1) के तहत मृत्युदंड दिया है। इसके अलावा बीएनएस की धारा 238(क) के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई है। अदालत के आदेश के अनुसार सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

हालांकि, मृत्युदंड की सजा पर अभी हाईकोर्ट की पुष्टि जरूरी है। पुष्टि होने तक आरोपी केंद्रीय जेल दुर्ग में ही रहेगा।

कन्या भोज में गई थी छह साल की बच्ची

मामला 6 अप्रैल 2025 का है। चैत्र नवरात्रि और रामनवमी के अवसर पर छह साल की बच्ची सुबह करीब 8 बजे कन्या भोज में शामिल होने अपने रिश्तेदार के घर गई थी। यह घर उसके घर से करीब 500 मीटर दूर था।

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद बच्ची घर वापस नहीं लौटी। परिवार ने उसकी तलाश शुरू की और मामले की सूचना मोहन नगर पुलिस को दी। पुलिस ने 6 अप्रैल को एफआईआर दर्ज कर बच्ची की तलाश शुरू की।

पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अलग-अलग टीमें बनाई गईं। पुलिस ने कई स्थानों पर तलाश के साथ आसपास के लोगों से पूछताछ की।

कार की पिछली सीट के नीचे मिली बच्ची

तलाश के दौरान बच्ची गंभीर हालत में मिली। पुलिस उसे अस्पताल लेकर पहुंची, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

जांच में बच्ची का शव एक कार की पिछली सीट के नीचे मिला था। पुलिस के अनुसार, उसके शरीर पर चोट और अन्य गंभीर निशान पाए गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन शोषण और गंभीर चोटों की पुष्टि हुई।

घटना की जानकारी सामने आने के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। गुस्साए लोगों ने कार मालिक के घर में आग लगाने का प्रयास भी किया। हालांकि, जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने कार मालिक को मामले में संदिग्ध नहीं माना और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।

चाचा सोमेश यादव पर गहराया शक

जांच के दौरान पुलिस ने बच्ची के चाचा सोमेश यादव से भी पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान उसके बयानों में विरोधाभास सामने आए और कुछ जवाब पुलिस को गुमराह करने वाले लगे।

विशेष टीम ने उसके बयानों का घटनाक्रम और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से मिलान किया। जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने सोमेश यादव को गिरफ्तार कर लिया।

उस पर बच्ची के साथ यौन अपराध और हत्या का आरोप लगाया गया।

DNA और वैज्ञानिक साक्ष्यों से मजबूत हुआ केस

दुर्ग पुलिस ने मामले की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों को अहम आधार बनाया। घटना से जुड़े अलग-अलग स्थानों से नमूने जुटाए गए और DNA जांच सहित अन्य वैज्ञानिक परीक्षण कराए गए।

पुलिस के अनुसार, जांच में मिले साक्ष्यों को केस डायरी में शामिल कर अदालत के सामने प्रस्तुत किया गया।

एएसपी मणि शंकर चंद्रा के मुताबिक, पुलिस ने बच्ची की तलाश से लेकर आरोपी की गिरफ्तारी और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने तक जांच के हर पहलू पर काम किया।

“बच्ची को तलाशकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर DNA समेत वैज्ञानिक सबूत जुटाए। इन्हीं सबूतों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई।”
— मणि शंकर चंद्रा, एएसपी दुर्ग


9 मई 2025 को पेश हुआ चालान

पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद 9 मई 2025 को अदालत में चालान पेश किया। इसके बाद 26 मई 2025 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए गए।

अदालत में 11 जून 2025 से गवाहों और साक्ष्यों की रिकॉर्डिंग शुरू हुई। मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो अदालत में हुई।

सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक रूपवर्षा दिल्लीवार ने पैरवी की, जबकि आरोपी की ओर से विधिक सहायता के माध्यम से डिप्टी एलएडीसी कमल किशोर वर्मा अदालत में पेश हुए।

2 सितंबर को फैसला सुरक्षित, 10 सितंबर को सजा

मामले में दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्यों पर सुनवाई के बाद अदालत ने 2 सितंबर 2026 को फैसला सुरक्षित कर लिया था।

इसके बाद 10 सितंबर 2026 को विशेष पॉक्सो अदालत ने सोमेश यादव को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई।

फांसी के साथ जुर्माना भी

अदालत के आदेश के अनुसार, पॉक्सो एक्ट की धारा 6(1) के तहत आरोपी को फांसी की सजा और 5 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं भरने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सश्रम सजा भुगतनी होगी।

इसी तरह बीएनएस की धारा 103(1) के तहत भी फांसी और 5 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।

वहीं, बीएनएस की धारा 238(क) के तहत आरोपी को 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 1 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। जुर्माना नहीं देने पर एक महीने की अतिरिक्त सश्रम सजा होगी।

अदालत ने स्पष्ट किया है कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

हाईकोर्ट की पुष्टि तक जेल में रहेगा आरोपी

मृत्युदंड के मामले में हाईकोर्ट की पुष्टि आवश्यक है। इसलिए आरोपी को फिलहाल केंद्रीय जेल दुर्ग में ही रखा जाएगा।

अदालत ने जेल अधीक्षक को आरोपी की सुरक्षित निगरानी में रखने का निर्देश दिया है। आरोपी 8 अप्रैल 2025 से जेल में बंद है। जेल में बिताई गई अवधि को सजा की गणना में शामिल किया जाएगा।

17 महीने बाद आया फैसला

छह साल की मासूम बच्ची की मौत के इस मामले में करीब 17 महीने तक चली जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया है। हालांकि, फांसी की सजा का अंतिम क्रियान्वयन हाईकोर्ट की पुष्टि पर निर्भर करेगा।

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