मजदूर की मौत के बाद मुआवजे के लिए पार्षद संजय सिंह ने निभाई अहम भूमिका

मजदूर की मौत के बाद मुआवजे के लिए पार्षद संजय सिंह ने निभाई अहम भूमिका

दुर्ग/जामुल। लाइट इंडस्ट्रियल एरिया जामुल स्थित एमएम भवानी जनरल इंटरप्राइजेस में काम के दौरान ऊंचाई से गिरने से श्रमिक के. नीलकंठ राव की मौत के बाद मुआवजे को लेकर परिवार और कंपनी प्रबंधन के बीच विवाद की स्थिति बन गई। परिवार के सामने आर्थिक संकट के बीच स्थानीय पार्षद संजय सिंह (वार्ड क्रमांक 29) ने मौके पर पहुंचकर मध्यस्थता की और मुआवजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

ऊंचाई से गिरने से श्रमिक की मौत

जानकारी के अनुसार, 27 अगस्त 2026 की शाम करीब 6 बजे कैम्प-1, सड़क नंबर 18, छावनी निवासी श्रमिक के. नीलकंठ राव एमएम भवानी जनरल इंटरप्राइजेस में काम कर रहे थे। काम के दौरान वह काफी ऊंचाई पर पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक संतुलन बिगड़ने से वह नीचे गिर गए। हादसे में नीलकंठ के सिर पर गंभीर चोट आई, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के बाद शव को लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल की मर्च्युरी में रखा गया।

परिवार में कमाने वाले एकमात्र सदस्य थे नीलकंठ

मृतक के परिवार में पत्नी, दो बेटियां और बुजुर्ग मां हैं। परिजनों के मुताबिक, नीलकंठ ही परिवार में कमाने वाले एकमात्र सदस्य थे। उनकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। दोनों बेटियों की पढ़ाई और घर की अन्य जिम्मेदारियां भी अब परिवार के लिए बड़ी चुनौती हैं।

सुरक्षा व्यवस्था पर परिवार ने उठाए सवाल

हादसे के बाद परिजनों ने कंपनी में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए। परिवार का आरोप है कि काम के दौरान श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते थे।

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के बाद घटनास्थल पर हेलमेट और रस्सी जैसी सुरक्षा सामग्री रखी गई, जबकि दुर्घटना के समय इनका इस्तेमाल किया गया था या नहीं, इसे लेकर सवाल हैं। हालांकि, कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था और हादसे की वास्तविक परिस्थितियां जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी। फिलहाल परिजनों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

20 लाख रुपये मुआवजे पर बनी थी सहमति

घटना के अगले दिन रक्षाबंधन के अवसर पर मृतक के परिजन, शुभचिंतक और मोहल्लेवासी, भाजपा युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष अमित सिंह ,मुआवजे की मांग को लेकर कंपनी प्रबंधन के पास पहुंचे। काफी देर तक बातचीत और विमर्श के बाद कंपनी प्रबंधन की ओर से 20 लाख रुपये मुआवजा देने पर सहमति बनने की बात सामने आई।

परिवार को आवश्यक दस्तावेज तैयार कर अगले दिन भुगतान के लिए बुलाया गया था। मुआवजा मिलने की उम्मीद में परिवार ने उस समय तक नीलकंठ राव का अंतिम संस्कार भी नहीं किया था।

भुगतान को लेकर फिर बनी विवाद की स्थिति

अगले दिन जब परिवार मुआवजे के लिए कंपनी के संचालक विशाल केजरीवाल से मिलने पहुंचा, तो परिजनों के अनुसार उन्हें तत्काल मुआवजा देने से इनकार कर दिया गया। उन्हें लेबर कोर्ट के माध्यम से मुआवजा लेने की बात कही गई। इससे परिवार के सदस्य बेहद आहत और परेशान हो गए। इसके बाद उन्होंने स्थानीय पार्षद संजय सिंह से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी।

पार्षद संजय सिंह ने की मध्यस्थता

परिवार की सूचना मिलते ही पार्षद संजय सिंह तत्काल कंपनी परिसर पहुंचे। उन्होंने कंपनी प्रबंधन से बातचीत कर पूरे मामले में मध्यस्थता की। बताया गया कि शुरुआती बातचीत में कंपनी प्रबंधन मुआवजे के भुगतान को लेकर टालमटोल कर रहा था।

इसके बाद पार्षद संजय सिंह ने परिवार की परिस्थितियों को सामने रखते हुए प्रबंधन से गंभीरता से चर्चा की और मुआवजे के भुगतान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए मामले का तत्काल समाधान कराने का प्रयास किया। उनकी समझाइश और हस्तक्षेप के बाद कंपनी प्रबंधन ने परिवार को तय मुआवजा देने पर सहमति जताई।

परिवार ने जताया आभार

नीलकंठ के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कठिन हो गई है। घर में बुजुर्ग मां, पत्नी और दो बेटियां हैं। ऐसे में मुआवजे की राशि परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मृतक के परिजनों ने संकट की इस घड़ी में साथ देने और कंपनी प्रबंधन से बातचीत कर मुआवजा दिलाने में अहम भूमिका निभाने के लिए पार्षद संजय सिंह के प्रति आभार व्यक्त किया।

वहीं, हादसे की परिस्थितियों और कंपनी में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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