
The CG ख़बर:भिलाई नगर, 28 दिसंबर।
भिलाई के प्रतिष्ठित कृष्णा एजुकेशन सोसायटी (कृष्णा पब्लिक स्कूल, नेहरू नगर) पर नगर निगम भिलाई के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर 6 हजार वर्गफुट जमीन हड़पने का संगीन आरोप सामने आया है। यह भूमि उद्यान और वृक्षारोपण के लिए आरक्षित थी, जिसे कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के सहारे शाला भवन निर्माण के लिए इस्तेमाल किया गया। सुपेला थाना में इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता रवि शर्मा (निवासी वैशाली नगर, भिलाई) ने अपने दस्तावेजों के साथ यह आरोप लगाया है कि:
- कृष्णा एजुकेशन सोसायटी ने नगर निगम भिलाई के अधिकारियों की मदद से फर्जी खसरा नंबर तैयार किया।
- आरक्षित भूमि के खसरा नंबर 836/837 को बदलकर 306 लिखते हुए, कूटरचित दस्तावेज बनाए गए।
- इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भवन अनुज्ञा प्राप्त की गई और शाला भवन का अवैध निर्माण किया गया।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
- 1986 में तत्कालीन मध्यप्रदेश शासन ने शाला स्थापना हेतु कृष्णा पब्लिक स्कूल को 60,00 वर्गफुट भूमि आबंटित की थी।
- खसरा नंबर: 306
- 2005 में छत्तीसगढ़ शासन ने स्कूल से लगी 5,999 वर्गफुट भूमि (खसरा नंबर: 836/837) को
- उद्यान/वृक्षारोपण के लिए विशेष शर्तों पर आबंटित किया।
- 2007 में कृष्णा एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष एम.एम. त्रिपाठी, सचिव प्रमोद त्रिपाठी, वास्तुविद आर.के. पटेल ने नगर निगम अधिकारियों के साथ षड्यंत्र रचते हुए:
- खसरा नंबर 836/837 के स्थान पर 306 दर्ज कर दिया।
- फर्जी भवन अनुज्ञा प्राप्त कर ली।
- इसके बाद, 2008 में भवन पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया।
- 2012 में नगर निगम अधिकारियों से मिलीभगत कर, अवैध भवन निर्माण को नियमित भी करवा लिया गया।
जांच और कार्रवाई
- 2016 में रवि शर्मा ने इस फर्जीवाड़े की शिकायत नगर निगम भिलाई और कलेक्टर को दी।
- मामले की जांच कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त ने अलग-अलग की।
- जांच रिपोर्ट में फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
उच्चतम न्यायालय के अनुसार, पार्क/उद्यान के लिए आरक्षित भूमि पर निर्माण कार्य एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
कानूनी पहलू
- सुपेला थाना में मामले को दर्ज किया गया है।
- आरोपी व्यक्तियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 120बी के तहत मामला दर्ज किया गया है।
- आरोपियों में शामिल:
- एम.एम. त्रिपाठी (अध्यक्ष, कृष्णा एजुकेशन सोसायटी)
- प्रमोद त्रिपाठी (सचिव)
- आर.के. पटेल (आर्किटेक्ट)
- नगर निगम भिलाई के अधिकारियों और कर्मचारियों
फर्जीवाड़ा उजागर होने में क्यों लगी देरी?
- नगर निगम भिलाई के अधिकारियों की इस मामले में सांठगांठ सामने आई है।
- आरोप है कि अधिकारियों ने मामले को दबाने की कोशिश की।
- रवि शर्मा ने 2018 में सुपेला थाने में एफआईआर की मांग की थी, लेकिन 6 वर्षों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
भविष्य की संभावनाएं
- इस घटना ने सरकारी तंत्र और निजी संस्थानों के बीच भ्रष्टाचार को उजागर किया है।
- पार्क/उद्यान के लिए आरक्षित भूमि की सुरक्षा और पुनःउपयोग के लिए सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।
- नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ जमीन के अवैध कब्जे का नहीं, बल्कि सरकारी अधिकारियों और निजी संस्थानों की मिलीभगत का एक बड़ा उदाहरण है। यदि दोषियों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में ऐसे फर्जीवाड़े और भी अधिक बढ़ सकते हैं।
क्या यह मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नई लड़ाई की शुरुआत करेगा?
