भिलाई निगम में करोड़ों का भ्रष्टाचार 🟥 उपनेता प्रतिपक्ष दया सिंह के ज्ञापन पर मंत्री अरुण साव ने  EOW जांच के तत्काल दिए निर्देश

भिलाई निगम में करोड़ों का भ्रष्टाचार 🟥 उपनेता प्रतिपक्ष दया सिंह के ज्ञापन पर मंत्री अरुण साव ने EOW जांच के तत्काल दिए निर्देश

भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई में पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुए निर्माण कार्यों और भुगतान प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। भाजपा के उपनेता प्रतिपक्ष दया सिंह ने नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव को पत्र लिखकर पूरे मामले की आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) से जांच कराने की मांग की है। मामले को गंभीर मानते हुए मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई और जांच के निर्देश दिए हैं।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि निगम के कुछ निर्माण कार्यों में नियमों की अनदेखी करते हुए ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया तथा सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता नहीं बरती गई। शिकायत में तत्कालीन आयुक्त सहित संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है।

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मुख्य आरोप – किन मामलों पर उठे सवाल?

■ 1. अवैध प्लॉटिंग क्षेत्र को लाभ पहुंचाने का आरोप

शिकायत पत्र के अनुसार वार्ड क्रमांक-22 स्थित शीतला तालाब दक्षिण मार्ग में 15वें वित्त आयोग मद से लगभग 72.30 लाख रुपए की लागत से डामरीकरण कार्य कराया गया।

आरोप है कि कार्य आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों के बिना किया गया तथा इसका लाभ अवैध प्लॉटिंग वाले क्षेत्र को पहुंचा। शिकायत में यह भी कहा गया कि गुणवत्ता परीक्षण पूर्ण हुए बिना ही लगभग 52 लाख रुपए का भुगतान जारी कर दिया गया।

📌 आरोप: नियमों के विपरीत निर्माण एवं भुगतान प्रक्रिया।

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■ 2. PF और ESI जमा नहीं, फिर भी भुगतान का आरोप

शिकायत में दावा किया गया है कि सफाई ठेकेदार द्वारा कर्मचारियों का PF एवं ESI जमा नहीं किया गया, इसके बावजूद निगम स्तर पर भुगतान जारी किया गया।

यह भी आरोप लगाया गया कि पूर्व आयुक्तों द्वारा भुगतान रोकने के निर्देश होने के बाद भी नियमों को दरकिनार कर भुगतान किया गया।

📌 आरोप: श्रमिक हितों की अनदेखी और वित्तीय प्रक्रिया पर सवाल।

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■ 3. चार पानी टंकियों के निर्माण में देरी, पेनल्टी नहीं

पत्र के अनुसार निगम क्षेत्र में निर्मित चार ओवरहेड पानी टंकियों का कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा नहीं हुआ।

शिकायत में कहा गया कि संबंधित फाइलों में समय सीमा विस्तार की अनुशंसा नहीं थी, इसके बावजूद देरी पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई और करोड़ों रुपए का भुगतान कर दिया गया।

📌 आरोप: सरकारी राजस्व को संभावित नुकसान।

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■ 4. छोटे निर्माण कार्यों को टुकड़ों में बांटने का आरोप

दया सिंह ने आरोप लगाया कि 50 हजार से 70 हजार रुपए तक के कई छोटे निर्माण कार्य अलग-अलग हिस्सों में स्वीकृत किए गए, जिससे नियमित निविदा प्रक्रिया से बचा जा सके।

आरोप है कि इससे कुछ चयनित ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।

📌 आरोप: प्रक्रिया पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न।

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EOW जांच की मांग

ज्ञापन में मांग की गई है कि पूरे मामले में निर्माण कार्य, भुगतान प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की उच्च स्तरीय EOW जांच कराई जाए, ताकि यदि किसी स्तर पर सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ हो तो उसकी वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

ज्ञापन सौंपने के दौरान मौजूद प्रमुख नेता

रामजी भारती – भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जिला प्रभारी

पुरुषोत्तम देवांगन – जिला अध्यक्ष

भोजराज भोजू – नेता प्रतिपक्ष

पीयूष मिश्रा – पार्षद

मनीष अग्रवाल – भाजपा महामंत्री

शैलेंद्र सिंह – जिला कोषाध्यक्ष

श्याम सुंदर राव – पूर्व सभापति

अन्य जनप्रतिनिधि एवं पार्षद


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महत्वपूर्ण

यह सभी आरोप शिकायत पत्र और ज्ञापन में लगाए गए हैं। संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया अथवा जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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