दुर्ग। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने वाली पंडवानी की अमर स्वर सम्राज्ञी, पद्मश्री, पद्मभूषण एवं पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई के निधन पर दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल ने गहरा शोक व्यक्त किया। सांसद विजय बघेल ग्राम गनियारी पहुंचकर दिवंगत लोक कलाकार के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन किए तथा पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
इस दौरान उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं तथा ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
सांसद विजय बघेल ने कहा कि 8 अगस्त 1956 को जन्मी डॉ. तीजन बाई ने अपनी विलक्षण प्रतिभा, अथक साधना और लोककला के प्रति अटूट समर्पण के बल पर छत्तीसगढ़ की पंडवानी परंपरा को देश ही नहीं, बल्कि विश्वभर में सम्मान दिलाया। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी विशिष्ट गायन शैली, सशक्त वाणी, अद्भुत अभिनय और भावपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाकर भारतीय लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई।
उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई का निधन केवल छत्तीसगढ़ की क्षति नहीं है, बल्कि यह पूरे भारतीय लोककला जगत और देश की सांस्कृतिक चेतना के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके स्वर में छत्तीसगढ़ की मिट्टी की सोंधी महक, लोकजीवन की आत्मा और भारतीय संस्कृति की जीवंत अनुभूति समाहित थी। उनका संपूर्ण जीवन लोक संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के लिए समर्पित रहा।
सांसद विजय बघेल ने कहा कि डॉ. तीजन बाई भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी अमर आवाज़, उनका संघर्ष, उनकी साधना और लोककला के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि यदि प्रतिभा के साथ कठिन परिश्रम और समर्पण हो तो गांव की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर भी विश्व के सर्वोच्च मंचों तक पहुंचा जा सकता है।
उन्होंने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने आज अपनी ऐसी महान सांस्कृतिक विभूति को खो दिया है, जिसकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकेगी। डॉ. तीजन बाई का अतुलनीय योगदान सदैव इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में अंकित रहेगा और उनकी कला आने वाली पीढ़ियों को अपनी लोक परंपराओं के संरक्षण तथा सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती रहेगी।
इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कलाकारों एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भी नम आंखों से पंडवानी की महान साधिका डॉ. तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके अप्रतिम योगदान को नमन किया।
डॉ. तीजन बाई का व्यक्तित्व और कृतित्व भारतीय लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर था। उनके जाने से भले ही एक युग का अंत हुआ हो, लेकिन उनकी अमर आवाज़ और लोककला की विरासत सदैव पीढ़ी-दर-पीढ़ी गूंजती रहेगी।
