छत्तीसगढ़ : महापौर के लिए होगी सीधी टक्कर  साय सरकार ने  बदली महापौर चुनाव प्रणाली: नगर पालिका अधिनियम में संशोधन

छत्तीसगढ़ : महापौर के लिए होगी सीधी टक्कर साय सरकार ने बदली महापौर चुनाव प्रणाली: नगर पालिका अधिनियम में संशोधन

छत्तीसगढ़ : महापौर के लिए होगी सीधी टक्कर  साय सरकार ने  बदली महापौर चुनाव प्रणाली: नगर पालिका अधिनियम में संशोधन

रायपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ में महापौर चुनाव प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए राज्य सरकार ने नगर पालिका अधिनियम में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। इस नए प्रावधान के तहत अब महापौर का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से किया जाएगा, जिससे जनता सीधे अपने महापौर का चयन करेगी। यह महत्वपूर्ण फैसला हाल ही में राज्य सरकार की कैबिनेट बैठक में लिया गया था और अब इसके अनुरूप आधिकारिक अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है।

कांग्रेस सरकार द्वारा महापौर चुनाव में परिवर्तन (2018 में संशोधन)

2018 में जब कांग्रेस सत्ता में आई और भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने महापौर चुनाव प्रक्रिया में बदलाव किया था। इसके पहले, छत्तीसगढ़ में महापौर का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होता था, जिसमें जनता सीधे महापौर का चुनाव करती थी। हालांकि, कांग्रेस सरकार ने इसमें संशोधन किया और महापौर को चुनने का अधिकार पार्षदों को दे दिया। इस फैसले पर राज्य में व्यापक बहस हुई और विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया। बीजेपी नेताओं ने जनता के अधिकारों को सीमित करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस सरकार की इस नीति का विरोध किया था।

वर्तमान में बीजेपी सरकार का फैसला: पुनः प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली की बहाली

सत्ता परिवर्तन के बाद, छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार ने नगर पालिका अधिनियम में पुनः संशोधन किया है, जिससे एक बार फिर महापौर का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली के माध्यम से होगा। अब छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में महापौर का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाएगा, जिससे उन्हें अपने प्रतिनिधि चुनने का सीधा अधिकार मिलेगा।

महापौर चुनाव प्रणाली में बदलाव का महत्व और प्रभाव

महापौर चुनाव में प्रत्यक्ष प्रणाली की वापसी से छत्तीसगढ़ की नगरीय राजनीति में बड़े बदलाव की संभावना है। प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव होने पर महापौर सीधे जनता के प्रति जवाबदेह होंगे और उन्हें अपनी योजनाओं और कार्यों के लिए जनता से सीधे समर्थन प्राप्त होगा।

प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के लाभ:

  1. सीधी जवाबदेही: प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली से महापौर जनता के प्रति सीधे जवाबदेह होंगे, जिससे पारदर्शिता में वृद्धि होगी।
  2. लोकप्रियता का महत्व: प्रत्यक्ष चुनाव में महापौर को जनता का विश्वास जीतना होगा, जिससे स्थानीय मुद्दों पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।
  3. लोकतंत्र की मजबूती: प्रत्यक्ष प्रणाली से जनता को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलेगा, जो लोकतंत्र को सशक्त बनाएगा।

नए फैसले का राजनीतिक दृष्टिकोण

बीजेपी सरकार का यह फैसला राज्य में एक बड़ा राजनीतिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि इस बदलाव से नगरीय निकाय चुनाव प्रक्रिया में जनता का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप बढ़ेगा। जनता के पास अपने पसंदीदा नेता को सीधे महापौर के रूप में चुनने का अधिकार होगा, जिससे राजनीतिक दलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की संभावना बढ़ जाएगी।

इस नए संशोधन को राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा छत्तीसगढ़ में सत्ता में बैठे दल की जनता के प्रति जवाबदेही बढ़ाने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने इस फैसले की सराहना की है, जबकि कई संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सुधार की दिशा में अहम पहल माना है।

छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव: एक नई दिशा

छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव में महापौर चुनाव प्रणाली में यह बदलाव नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। जनता को महापौर चुनने का अधिकार मिलना स्थानीय प्रशासन में जनता की सीधी भागीदारी को दर्शाता है। इससे शासन में पारदर्शिता और जनसमर्थन की एक नई लहर आएगी।

छत्तीसगढ़ की जनता के लिए प्रत्यक्ष महापौर चुनाव प्रणाली का क्या महत्व है?

इस बदलाव से राज्य के लोग अपनी नगरीय व्यवस्था में अधिक सक्रियता से शामिल हो सकेंगे और महापौर की नीतियों और कार्यों का सीधा मूल्यांकन कर सकेंगे। महापौर को अब न केवल पार्षदों बल्कि पूरी जनता के प्रति जवाबदेह रहना होगा। इससे राज्य में नगरीय विकास और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव होगा।

निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ में महापौर चुनाव प्रणाली में परिवर्तन के निहितार्थ

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रत्यक्ष महापौर चुनाव प्रणाली की वापसी से राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को एक नई दिशा मिली है। यह फैसला न केवल जनता को अधिक सशक्त बनाएगा बल्कि राज्य में नगरीय विकास को भी गति देगा। अब जनता के पास अपने महापौर का चुनाव करने का अधिकार होगा, जिससे एक पारदर्शी, सशक्त और जवाबदेह प्रशासन का मार्ग प्रशस्त होगा।

छत्तीसगढ़ में महापौर चुनाव प्रणाली में इस बदलाव से राज्य के नागरिकों की भूमिका को और भी महत्वपूर्ण बना दिया गया है। आने वाले नगरीय निकाय चुनावों में इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा।


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