बलौदाबाजार हिंसा केस : हाईकोर्ट की सख्ती 🟥 अमित बघेल समेत 3 आरोपियों की जमानत खारिज

बलौदाबाजार हिंसा केस : हाईकोर्ट की सख्ती 🟥 अमित बघेल समेत 3 आरोपियों की जमानत खारिज

“भीड़ को भड़काकर कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों को नहीं मिलेगी राहत”

The CG ख़बर | रायपुर/बलौदाबाजार। पिछले साल 10 जून 2024 को बलौदाबाजार में हुई हिंसा और आगजनी की घटना ने पूरे छत्तीसगढ़ को हिला दिया था। एक सामाजिक मुद्दे को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते हिंसक बवाल में बदल गया था। हजारों की भीड़ ने कलेक्ट्रेट और एसपी कार्यालय परिसर में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की, वाहनों को आग के हवाले कर दिया और पुलिस जवानों पर हमला किया। इस घटना के बाद से मामला लगातार प्रदेश की राजनीति और कानून व्यवस्था के केंद्र में बना हुआ है।

इसी बहुचर्चित बलौदाबाजार हिंसा मामले में अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा और सख्त संदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि हजारों लोगों की भीड़ को भड़काकर सरकारी संपत्ति में आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिस पर हमला कराने जैसे गंभीर मामलों में आरोपियों को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस एनके व्यास ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा,

“आरोपियों ने 7 से 8 हजार लोगों की भीड़ को भड़काकर 13 से 14 करोड़ रुपए की सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। पुलिस अधिकारियों और जवानों पर जानलेवा हमला कराया गया। समाज में शांति और कानून व्यवस्था को पूरी तरह बिगाड़ने वाले ऐसे गंभीर अपराध में आरोपियों को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।”

अदालत ने यह भी माना कि हिंसा के दौरान पुलिस जवानों और अधिकारियों पर जानलेवा हमला किया गया, जिससे कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी

इसी के साथ हाईकोर्ट ने बलौदाबाजार बवाल, पथराव और कलेक्ट्रेट परिसर में आगजनी मामले में छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के संस्थापक अमित बघेल समेत तीन आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

भड़काऊ भाषण के बाद हिंसक हुई थी भीड़

दरअसल, 10 जून 2024 को बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में एक सामाजिक मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। हजारों लोग इस प्रदर्शन में शामिल हुए थे। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान मंच से दिए गए भड़काऊ भाषणों के बाद माहौल अचानक हिंसक हो गया।

उग्र भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़ते हुए कलेक्ट्रेट और एसपी कार्यालय परिसर में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। सैकड़ों वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया, वहीं कलेक्ट्रेट भवन तक जल उठा। पूरे इलाके में घंटों अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बना रहा।

पुलिस जवानों और अफसरों पर हमला

हिंसा को नियंत्रित करने पहुंचे पुलिस अधिकारियों और जवानों को भीड़ ने निशाना बनाया। आरोप है कि लाठी, पत्थर और लोहे की रॉड से हमला किया गया, जिसमें कई policeकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए थे।

मामले में पुलिस ने छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के संस्थापक अमित बघेल, अजय यादव, दिनेश वर्मा समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसी मामले में तीनों आरोपियों ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी।

“घटना के समय मौजूद नहीं था” — अमित बघेल की दलील खारिज

सुनवाई के दौरान अमित बघेल की ओर से अदालत में दावा किया गया कि हिंसा के समय वे अपनी पत्नी ईश्वरी बघेल के साथ रजिस्ट्रार कार्यालय में मौजूद थे। बचाव पक्ष ने कहा कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच वे रजिस्ट्री की प्रक्रिया में शामिल थे।

हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि प्रस्तुत दस्तावेजों में ऐसा कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि घटना के समय अमित बघेल रजिस्ट्रार कार्यालय में मौजूद थे।

विशेष टिप्पणी (Direct Quote)

“आवेदक द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज घटना के समय उसकी उपस्थिति को प्रमाणित नहीं करते। यह दलील सच्चाई से परे प्रतीत होती है।”

आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर जमानत का विरोध

सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से यह भी कहा गया कि सह-आरोपी नोविल कुमार नवरंग को दो महीने चार दिन जेल में रहने के बाद जमानत मिल चुकी है, इसलिए उन्हें भी राहत मिलनी चाहिए।

इस पर राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने आरोपियों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड कोर्ट के सामने रखा। रिकॉर्ड के मुताबिक अमित बघेल के खिलाफ 17, अजय यादव के खिलाफ 13 और दिनेश कुमार वर्मा के खिलाफ एक आपराधिक मामला पहले से दर्ज है।

हाईकोर्ट ने कहा कि जिस सह-आरोपी को पहले जमानत मिली थी, उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं था, जबकि वर्तमान आवेदकों के खिलाफ गंभीर मामलों की लंबी सूची मौजूद है

कुल 9 जमानत याचिकाएं खारिज

हाईकोर्ट ने अमित बघेल की चार, अजय यादव की चार और दिनेश कुमार वर्मा की एक याचिका समेत कुल 9 जमानत याचिकाओं को एक साथ खारिज कर दिया। अदालत ने साफ संकेत दिया कि सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और हिंसा फैलाने वाले मामलों में सख्त रुख अपनाया जाएगा।

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