The CG ख़बर | रायपुर |
छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों “सनातन बनाम सेक्युलर राजनीति” की बहस तेज होती जा रही है।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य को लेकर कांग्रेस नेताओं के बयानों ने प्रदेश की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। अब भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को वैचारिक लड़ाई का रूप देना शुरू कर दिया है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता कन्हैया सोनी ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि —
“कांग्रेस पार्टी आज हिंदुत्व, सनातन और संत समाज के अपमान की राजनीति कर रही है। यही उसका नया राजनीतिक एजेंडा बन चुका है।”
क्या कहा था चरणदास महंत ने ?
दरअसल, विवाद की शुरुआत उस बयान से हुई जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चरणदास महंत ने कहा था कि —
“मैं रामभद्राचार्य को जगद्गुरु नहीं मानता।”
इतना ही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य भारतीय जनता पार्टी के “प्रचारक” की तरह काम कर रहे हैं।
महंत ने यह भी कहा कि संतों को राजनीति से दूर रहना चाहिए और किसी दल विशेष के समर्थन में बयान नहीं देना चाहिए।
बस… यही बयान अब प्रदेश की राजनीति में बड़े वैचारिक संघर्ष की वजह बन गया है।
🟥 “एक लाइन बता दें…” — कन्हैया सोनी की खुली चुनौती
कन्हैया सोनी ने चरणदास महंत को खुली चुनौती देते हुए कहा —
“चरणदास महंत एक लाइन बताकर दिखा दें, जहां जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भारतीय जनता पार्टी को वोट देने या समर्थन करने की अपील की हो। आज तक ऐसा कोई बयान सामने नहीं आया। यह सब कांग्रेस नेताओं के दिमाग की उपज है।”
उन्होंने आगे कहा —
“चरणदास महंत छत्तीसगढ़ की राजनीति का बड़ा नाम रहे हैं। लोग उन्हें सुलझा हुआ नेता मानते थे। लेकिन उनके इस बयान से लगता है कि वह भी अब भूपेश बघेल की तरह सनातन और हिंदुत्व विरोधी राजनीति की राह पर चल पड़े हैं।”
BJP नेता का आरोप
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“कांग्रेस का राजनीतिक डीएनए”
✔ सनातन का विरोध
✔ हिंदुत्व पर हमला
✔ संत-महंतों पर अभद्र टिप्पणी
✔ राष्ट्रवादी विचारधारा पर प्रहार
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“संतों के खिलाफ अभद्र भाषा कांग्रेस की पहचान बन गई”
कन्हैया सोनी ने कांग्रेस पर बड़ा वैचारिक हमला बोलते हुए कहा —
“आज पूरे देश में कांग्रेस पार्टी केवल एक लाइन पर राजनीति कर रही है — सनातन और हिंदुत्व का अपमान। चाहे छत्तीसगढ़ हो या देश का कोई और राज्य, कांग्रेस के नेता लगातार संतों और हिंदू धार्मिक प्रतीकों के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की राजनीति अब “तुष्टिकरण और वैचारिक विरोध” तक सीमित होकर रह गई है।
✍️अब यह सिर्फ बयान नहीं… विचारधाराओं की लड़ाई!
राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है।
भाजपा इस पूरे मामले को “सनातन सम्मान” और “संत समाज के अपमान” से जोड़कर बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इसे “धर्म और राजनीति के मिश्रण” का मामला बताकर अपने पुराने धर्मनिरपेक्ष रुख को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
भाजपा का मिशन : विचारधारा को जमीन तक ले जाना
प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी इन दिनों प्रशिक्षण शिविरों, संगठनात्मक बैठकों और वैचारिक कार्यक्रमों के जरिए अपनी विचारधारा को कार्यकर्ताओं तक पहुंचाने में जुटी हुई है।
संगठन स्तर पर हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक मुद्दों को फिर से केंद्र में लाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
कांग्रेस भी कर रही संगठन को धारदार बनाने की तैयारी
दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी संगठन के पुनर्गठन और नई राजनीतिक रणनीति के जरिए खुद को मजबूत करने में लगी हुई है।
लेकिन रामभद्राचार्य विवाद ने कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच वैचारिक ध्रुवीकरण को और तेज कर सकता है।
“रामभद्राचार्य विवाद” या 2028 की वैचारिक पिच?
फिलहाल, जगद्गुरु रामभद्राचार्य को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब केवल एक बयान का मामला नहीं रह गया है।
यह छत्तीसगढ़ की राजनीति में हिंदुत्व बनाम धर्मनिरपेक्षता की नई बहस का संकेत देता दिखाई दे रहा है।
और सबसे बड़ा सवाल यही है —
“क्या आने वाले चुनावों में सनातन और हिंदुत्व का मुद्दा फिर प्रदेश की राजनीति का केंद्र बनने वाला है?”
