The CG ख़बर । पुरी/नई दिल्ली। विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ पुरी रथयात्रा को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। पुरी के गजपति महाराज ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि ISKCON (इस्कॉन) विदेशों में पुरी की परंपरा और धार्मिक पंचांग से अलग तिथियों पर रथयात्रा आयोजित कर रहा है, जिससे सनातन परंपराओं का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने इस विषय में आवश्यक हस्तक्षेप कर परंपराओं की रक्षा करने की मांग की है।
क्या है पूरा विवाद?
गजपति महाराज का कहना है कि पुरी श्रीजगन्नाथ मंदिर की रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा और शास्त्रीय विधि से जुड़ा महापर्व है। ऐसे में दुनिया के अलग-अलग देशों में इसकी तिथि बदलकर आयोजन करना धार्मिक मान्यताओं के विपरीत है।
उनका कहना है कि यदि रथयात्रा का आयोजन करना है तो पुरी के आधिकारिक धार्मिक पंचांग (पंचिका) के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
मध्य प्रदेश बना विवाद का बड़ा कारण
इस बार विवाद का सबसे बड़ा कारण मध्य प्रदेश रहा। जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के कुछ शहरों में ISKCON द्वारा भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा पुरी की आधिकारिक तिथि से पहले आयोजित की गई, जिस पर पुरी श्रीजगन्नाथ मंदिर से जुड़े सेवायतों और गजपति महाराज ने कड़ी आपत्ति जताई।
उनका कहना है कि जब पुरी धाम में भगवान जगन्नाथ अभी रथ पर विराजमान ही नहीं हुए हैं, उससे पहले किसी अन्य स्थान पर रथयात्रा निकालना शास्त्रीय परंपरा के अनुरूप नहीं माना जा सकता। इसी मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र भेजा गया है।
इस्कॉन का क्या है पक्ष?
इस्कॉन का तर्क है कि रूस सहित कई देशों में वहां का मौसम, सरकारी नियम, सार्वजनिक अवकाश और स्थानीय परिस्थितियां कई बार शास्त्रों में निर्धारित तिथि पर विशाल रथयात्रा निकालने की अनुमति नहीं देतीं।
इसी कारण संगठन स्थानीय प्रशासन और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुविधाजनक तिथि पर रथयात्रा आयोजित करता है, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु इसमें भाग ले सकें।
2024 और 2025 में भी उठा था विवाद
यह विवाद पहली बार सामने नहीं आया है।
2024 में भी रथयात्रा की अलग-अलग तिथियों को लेकर विवाद हुआ था।
2025 में पुरी के गजपति महाराज ने ISKCON से अनुरोध किया था कि विदेशों में भी पुरी के धार्मिक पंचांग के अनुसार ही रथयात्रा आयोजित की जाए।
2026 में यह विवाद इसलिए और अधिक चर्चा में आ गया क्योंकि कई देशों में रथयात्रा पुरी की निर्धारित तिथि से कई सप्ताह पहले आयोजित कर दी गई, जिसके बाद इस पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई गई।
धार्मिक परंपरा बनाम व्यावहारिक व्यवस्था
इस पूरे मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं।
एक ओर पुरी श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन और गजपति महाराज परंपराओं एवं शास्त्रीय तिथियों के पालन पर जोर दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस्कॉन का कहना है कि विभिन्न देशों की भौगोलिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के कारण हर स्थान पर एक ही तिथि पर आयोजन संभव नहीं हो पाता।
अब सबकी नजर केंद्र सरकार पर
गजपति महाराज द्वारा राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखे जाने के बाद अब यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं की नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार इस विषय पर क्या रुख अपनाती है और भविष्य में इस प्रकार के विवादों के समाधान के लिए क्या पहल की जाती है।
मुख्य बिंदु
पुरी के गजपति महाराज ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखा पत्र।
ISKCON पर पुरी की परंपराओं से अलग तिथियों पर रथयात्रा आयोजित करने का आरोप।
इस्कॉन ने मौसम, स्थानीय कानून और प्रशासनिक कारणों को बताया आधार।
2024 और 2025 में भी उठ चुका है यही विवाद।
2026 में कई देशों में पहले रथयात्रा होने पर विवाद और गहरा गया।
धार्मिक परंपरा और वैश्विक परिस्थितियों के बीच संतुलन पर बहस तेज।
